छत्तीसगढ़ में एक अक्टूबर से अगले साल 30 सितंबर तक छोटे दुकानदारों जैसे राशन, सैलून, चाय और नाश्ते के ठेले वाले, रिक्शा, ऑटो चलाने वाले, कोऑपरेटिव सोसाइटी, आटे और दाल के ट्रेडर्स, ब्रोकर, निजी स्कूल, ट्यूटर, ट्रस्ट, सोसायटी की आय जानी जाएगी। प्रदेश के 228 गांवों और रायपुर समेत 165 शहरों में सर्वे टीमें पहुंचेगी। उनसे धंधे में लगाई रकम और होने वाली आय का अंतर पता किया जाएगा। इससे यह सामने आएगा कि देश की अर्थव्यवस्था में एक साल में छत्तीसगढ़ के लोगों का कितना योगदान है।
केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय घरेलू उपभोग व्यय सर्वे कराएगा। उसने इन छोटे दुकानदारों को असमाविष्ट क्षेत्र के उद्यमों में रखा है, जिनका कंपनी एक्ट में कहीं पंजीयन नहीं है। इनमें कमीशन एजेंट, निजी अस्पताल, टिकट एजेंट भी शामिल हैं। इस सर्वे से माइनिंग, कृषि और सरकारी एजेंसियों को शामिल नहीं किया गया है। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने नक्शे के आधार पर सर्वे वाले स्थानों का चयन किया है। इनमें रायपुर संभाग में 160 जगह हैं। इनमें से 40 पॉकेट राजधानी और उसके आसपास हैं। ये स्थान वो हैं जहां सूची में दिए कारोबार संचालित होते हैं।
देशभर का फाइनल डाटा आने के बाद पता चल सकेगा कि देश के आर्थिक विकास में यह सेक्टर कितना हिस्सेदार हैं। इससे GDP में भी योगदान का पता चलेगा। यह भी पता चलेगा कि कौन से सेक्टरों में ज्यादा काम हुआ है किनमें कम। इस रिपोर्ट से देश में नई नीति बनाने, पिछली नीतियों के असर का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी। यदि के सर्वे करते वक्त संबंधित क्षेत्र में कोई गैस एजेंसी आएगी, तो उसको भी कवर किया जाएगा। इसमें एजेंसी और उपभोक्ता के बीच होने वाले ट्रांजेक्शन और आय का भी आंकलन होगा। यानी आय को लेकर संचालित सभी संस्थाओं तक टीमें पहुंचेगी, जो संगठित क्षेत्र में नहीं आती हैं।