गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में बुधवार को आंवला नवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। ये त्योहार दीपावली के नौवें दिन मनाया जाता है। आज के दिन महिलाएं आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर सपरिवार भोजन करती हैं। भोजन से पहले विधिवत तरीके से आंवले के पेड़ की पूजा और उसकी परिक्रमा की जाती है।
महिलाएं आंवले के पेड़ की पूजा कर भगवान से खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं। जिले के दत्तात्रेय परिसर, इंदिरा उद्यान, मलनिया सहित धनौली के सिद्ध बाबा आश्रम में बुधवार सुबह से ही लोगों की भीड़ लगी हुई है और लोग आंवला नवमी का त्योहार सपरिवार मना रहे हैं। आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके नीचे भोजन करने की परंपरा शुरू करने वाली माता लक्ष्मी मानी जाती हैं।पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आईं। रास्ते में भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा एक साथ करने की उनकी इच्छा हुई। लक्ष्मी मां ने विचार किया कि एक साथ विष्णु और शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी उन्हें ख्याल आया कि तुलसी और बेल के गुण एक साथ आंवले में पाए जाते हैं। तुलसी श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है और बेल भगवान भोलेनाथ को, इसलिए आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर मां लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष की पूजा संपन्न की।