बालको की एक और सफलता:एल्यूमिनियम स्मेल्टर में बायोडीजल के इस्तेमाल की सक्सेसफुल टेस्टिंग;

बालको की एक और सफलता:एल्यूमिनियम स्मेल्टर में बायोडीजल के इस्तेमाल की सक्सेसफुल टेस्टिंग;

कोरबा जिले में स्थित वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी (बालको) ने स्मेल्टर संचालन में बायोडीजल का उपयोग करने के अपने पहले परीक्षण में सफलता प्राप्त कर ली है। कंपनी ने पिघली हुए गर्म धातु (एल्यूमिनियम) को लेकर जाने वाले लैडल्स को गर्म करने के लिए बायोडीजल का इस्तेमाल किया।

गर्म धातु को उच्च ताप पर ही पॉटलाइन से कास्ट हाउस तक लेकर जाने के लिए लैडल्स की जरूरत पड़ती है। एक बड़े क्षेत्र में फैले हुए पॉटलाइन में एल्यूमिना पाउडर को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के द्वारा पिघले एल्यूमिनियम में परिवर्तित किया जाता है। लैडल के भीतर की नमी को खत्म करने के लिए प्री-हीटिंग प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे पिघले हुए एल्यूमिनियम को विभिन्न उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए कास्ट हाउस लेकर जाने के दौरान धातु की शुद्धता और उच्च ताप को बनाए रखा जा सके।

बायोडीजल कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त ईंधन का रूप है, जिसके उपयोग से जीवाश्म ईंधन की तुलना में काफी कम ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन होता है और यह किसानों की आय वृद्धि में सहायक है। ये टेस्टिंग वेदांता कंपनी के विजन नेट जीरो कार्बन के अनुरूप है। इस दिशा में बालको हरित ईंधन के विभिन्न स्रोतों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमास, बायोडीजल के माध्यम से अपने ऊर्जा मिश्रण में हरित ऊर्जा की मात्रा को बढ़ाने पर विचार कर रही है।कंपनी वर्तमान में प्रतिदिन 40-50 टन बायोमास ब्रिकेट का उपयोग करते हुए जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम कर रही है। भविष्य में बायोमास खपत की मात्रा को और बढ़ाने की योजना है। डीकार्बोनाइजेशन की यात्रा में ऊर्जा संरक्षण और हरित ईंधन में वृद्धि बालको के दो महत्वपूर्ण पहल हैं। वित्त वर्ष 2022 में बालको ने विभिन्न उर्जा संरक्षण के माध्यम से लगभग 22000 गीगा जूल ऊर्जा की बचत की है।

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