मणिपुर में दो समुदाय के बीच भड़की हिंसा को लेकर मंगलवार को भी SC में सुनवाई हुई। अदालत ने आज की सुनवाई के दौरान राज्य में जातीय हिंसा से संबंधित मणिपुर पुलिस की जांच को “बेहद सुस्त” बताया और तल्ख लहजे में कहा कि “राज्य की कानून-व्यवस्था और मशीनरी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है”। कोर्ट यह जानकर हैरान था कि लगभग तीन महीने तक FIR दर्ज नहीं की गई थी और हिंसा पर दर्ज 6000 एफआईआर में से अब तक केवल खानापूर्ति के लिए कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं। कोर्ट ने मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) को शुक्रवार दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के पूर्व जजों को कमेटी बनाने की बात कही। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि ‘हम ये भी देखेंगे कि CBI को कौन-कौन से मुकदमे-FIR जांच के लिए सौंपे जाएं। सरकार इस समस्या का समाधान निकाल कर ही अदालत ने आये।