अपने लोगों पर गर्व करने की परंपरा करनी होगी विकसित : उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार

अपने लोगों पर गर्व करने की परंपरा करनी होगी विकसित : उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार

संस्कार देने की कोई मशीन नहीं होती, संस्कार हमारे व्यवहार और आचरण से आता है। संस्कार समृद्ध, देशभक्त एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अनुरूप शिक्षा का मूल ध्येय है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने शनिवार को उच्च शिक्षा उत्कृष्टता शिक्षा संस्थान, भोपाल में नवनिर्मित “आर्यभट्ट भवन” के लोकार्पण समारोह में कही।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में शून्य का अविष्कार करने वाले आर्यभट्ट के नाम पर इस भवन का नामकरण किया जाना गौरव का विषय है। आर्यभट ने विश्व की भ्रामक अवधारणाओं को सही दिशा देने का काम किया था। भारत ने हमेशा तर्क और ज्ञान के आधार पर विश्वमंच पर श्रेष्ठता सिद्ध की है। हमारे गौरवशाली इतिहास, ज्ञान और विज्ञान के आधार स्तंभ को मजबूत करने का कार्य यह भवन करेगा। विश्वमंच पर देश की शान को पुनर्स्थापित करने के लिए हमें अपने लोगों की उपलब्धियों पर गर्व करने की परंपरा विकसित करनी होगी। भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण के पुनर्शोध की आवश्यकता है। स्वत्व के भाव के उद्घोष के साथ ही स्वाभिमानी राष्ट्र@2047 के विकसित भारत” का संकल्प साकार होगा। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के केन्द्र में स्थित होने के कारण यह नवीन भवन विद्यार्थियों के लिए अत्यधिक उपयोगी एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगा, ऐसी आशा है।

भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) विधायक श्री भगवान दास सबनानी ने संस्थान में नवीन भवन के लोकार्पण के लिए संस्थान परिवार को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शासन और संस्था के मध्य सेतु की तरह प्रतिबद्धता से कार्य करता रहूंगा।

ज्ञातव्य है कि संस्थान में निर्मित नवीन “आर्यभट्ट भवन” तीन मंजिला भवन है, जो लिफ्ट, वाटर रिचार्ज सिस्टम, कम्प्यूटर नेटवर्किंग तथा वाई-फाई से सुसज्जित है। इस भवन में 14 क्लासरूम, 06 प्रयोगशालाएँ, 01 केन्द्रीय प्रयोगशाला, एक सेमीनार हॉल, सामान्य कार्यक्रमों हेतु एक विशाल प्रांगण तथा आईक्यूएसी, प्रशासनिक अधिकारी कक्ष एवं एडमिशन सेल उपलब्ध है। संस्थान में लगभग 3600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जहाँ 35 से अधिक स्नातक पाठ्यक्रम, 14 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम तथा 08 शोध केन्द्र उपलब्ध हैं।

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