महिला-बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल संरक्षण समिति के नव नियुक्त सदस्यों के ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समिति या किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों को कई अधिकार प्राप्त होते हैं। देखरेख एवं संरक्षण की जरुरत वाले बच्चों एवं विधि विवादित बच्चों के सम्बन्ध में आपके निर्णय बच्चों का भविष्य तय करते हैं। इसलिए बच्चों के सर्वोत्तम हित में न्यायोचित निर्णय लें, यही सभी से अपेक्षा है।
मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 एक व्यापक कानून है जो किशोरों की समृद्धि और विकास के लिए न्याय और अवसरों की व्यवस्था करता है। यह कानून बच्चों का सर्वोत्तम हित सुनिश्चित करता है और देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों एवं विधि विवादित बच्चों के मूलभूत मानव अधिकारों के संरक्षण हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वोत्तम हित में इस कानून को और किशोर न्याय प्रणाली के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा। सुश्री भूरिया ने कहा कि आप सभी को बच्चों के कल्याण और संरक्षण का दायित्व सौंपा जा रहा है, उसका निर्वहन आप ही कर सकते हैं, कोई और यह नहीं कर सकता, इसलिए आप अपना कार्य पूरी तन्मयता और सतर्कता के साथ करें।
कार्यक्रम में विभागीय आयुक्त श्रीमती सूफिया फारूकी वली ने भी प्रतिभागियों को संबोधित कर किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के प्रति पर्याप्त समझ विकसित कर पूरी संवेदनशीलता के साथ बच्चों के पुनर्वास से सम्बंधित निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।