मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को इंदौर के मन कामनेश्वर महादेव उद्यान में पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान द्वारा आयोजित छठ महोत्सव में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने जलाभिषेक कर छठ पूजन किया और प्रदेशवासियों को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा, “हमारी माताएं-बहनें अपनी आस्था और संस्कारों के साथ यह पर्व मनाती हैं। वे अपने परिवार के कष्टों को दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए आनंद के साथ जीवन के कष्टों को सहन करते हुए यह व्रत रखती हैं। मैं इन माता-बहनों को नमन करता हूं।”
उन्होंने छठ पूजा को सूर्य उपासना, परिवार के स्वास्थ्य और जीवन के दीर्घायु के संकल्प का प्रतीक बताया और कहा कि यह पर्व त्रेता युग में भगवान श्रीराम की लंबी आयु की कामना से आरंभ हुआ था।
मातृशक्ति की भक्ति और शक्ति का प्रतीक: मुख्यमंत्री ने छठ महापर्व को सामाजिक एकता, आस्था और लोक परंपरा का अद्वितीय संगम बताया। उन्होंने कहा कि भले ही यह पर्व विशेष रूप से बिहार और पूर्वांचल का है, लेकिन मालवांचल से बिहार का संबंध लगभग एक हजार साल पुराना है। उन्होंने यह भी बताया कि इंदौर में ही लगभग 200 से अधिक स्थानों पर छठ पूजन के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करते हैं।
आस्था के लिए बनेंगे जलकुण्ड: नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भारत ही ऐसा देश है, जहां माताएं-बहनें पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। उन्होंने आस्था और सुविधा के लिए प्रदेश में “एक नहीं हजार कुण्ड” बनाने की घोषणा की। जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि मुख्यमंत्री की पिछली घोषणा के अनुसार इंदौर के अन्नपूर्णा, पिपल्याहाना और छोटा बांगड़दा में तीन बड़े जल कुण्ड बनाने का कार्य प्रगति पर है।
इस मौके पर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।