उज्जैन में 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह का वर्चुअल शुभारंभ

उज्जैन में 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह का वर्चुअल शुभारंभ

भोपाल/उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उज्जैन को महाकवि कालिदास की कर्मभूमि बताते हुए इसे महाकाल की नगरी के साथ-साथ ज्ञान और विज्ञान की धरती कहा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर उज्जैन को एयरपोर्ट और हवाई मार्ग की सौगात मिली है।

महाकवि कालिदास का महत्त्व:

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन से जनसमूह को संबोधित करते हुए महाकवि कालिदास को भारतीय संस्कृति के तेजस्वी प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कालिदास की कृतियाँ—जैसे ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ और ‘मेघदूतम्’—भारतीय साहित्य की अनमोल धरोहर हैं, जिनमें प्रेम, प्रकृति, श्रृंगार और जीवन दर्शन की गहन अभिव्यक्ति है।

समारोह की परंपरा और विस्तार:

डॉ. यादव ने याद दिलाया कि इस प्रतिष्ठित समारोह की नींव 1958 में पं. सूर्य नारायण व्यास ने रखी थी, और इसके पहले आयोजन में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उज्जैन पधारे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य, संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं से जोड़ा जाए

समारोह में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी सहित कई विधायक, महापौर और देश भर से विद्वान, साहित्यकार एवं कलाप्रेमी मौजूद रहे।

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