दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को लताड़ा और प्रदूषण के लिए सिर्फ किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर नाराजगी जताई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल किया: “4-5 साल पहले कोविड और लॉकडाउन के दौरान भी पराली जलाई जा रही थी, फिर भी आसमान साफ और नीला दिखाई देता था, अब क्यों नहीं?”
बेंच ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने के मसले को राजनीतिक या अहंकार का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली की जहरीली हवा के कई कारण हैं। कोर्ट ने CAQM की ओर से पेश ASG ऐश्वर्या भाटी से पराली के अलावा प्रदूषण के प्रमुख कारणों का साइंटिफिक एनालिसिस करने को कहा।
ASG भाटी ने बताया कि पंजाब, हरियाणा और CPCB सहित सभी एजेंसियों की कार्रवाई रिपोर्ट जल्द दी जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि शून्य पराली दहन का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, हालांकि पराली जलाना एक मौसमी कारण ही है। जस्टिस बागची ने निर्माण कार्यों को भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताया।
कोर्ट ने कहा कि वह हर महीने कम से कम दो बार इस मामले की सुनवाई करेगा, ताकि इतिहास खुद को न दोहराए।