राष्ट्रीय बालरंग: ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का सच्चा प्रतिबिंब – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

राष्ट्रीय बालरंग: ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का सच्चा प्रतिबिंब – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोपाल में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय बालरंग ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उद्देश्य को सफलतापूर्वक साकार कर रहा है, और यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया है।

शुक्रवार शाम, राष्ट्रीय इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय में राष्ट्रीय बालरंग समारोह को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक नृत्य प्रतियोगिता के विजेता राज्यों के बच्चों को ट्राफी प्रदान की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में अन्य राज्यों की संस्कृति के प्रति जिज्ञासा बढ़ाते हैं और देश की संस्कृति से उनका लगाव मजबूत होता है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम उज्जैन में है, और लगभग 5 हजार वर्ष पहले श्रीकृष्ण मध्यप्रदेश की धरती पर आए थे। उन्होंने कहा कि बालरंग का परिसर एक ‘मिनी भारत’ का रूप ले लेता है, जो हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का अवसर देता है।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने विविधता में एकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत जैसा देश दुनिया में शायद ही कहीं होगा, जहाँ हर 50 से 75 किलोमीटर पर संस्कृति बदलती है। उन्होंने बालरंग को एक श्रेष्ठ आयोजन बताते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को बधाई दी।

राष्ट्रीय बालरंग के विजेता:

  • प्रथम पुरस्कार: झारखंड का छऊ लोकनृत्य (विशिष्ट मुखौटों का समन्वय)।
  • द्वितीय पुरस्कार: हरियाणा का घूमर लोकनृत्य (सामाजिक जीवन और लोक कथाओं की झलक)।
  • तृतीय पुरस्कार: असम का बिहू लोकनृत्य (बसंत ऋतु के आगमन पर)।

इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को सांत्वना पुरस्कार मिले। समारोह में 14 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के 400 से अधिक स्कूली छात्रों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।

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