सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सुनवाई की बड़ी बातें:
- लापरवाही पर हर्जाना: कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि कुत्ते के काटने से किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत होती है या कोई घायल होता है, तो राज्य सरकार को भारी मुआवजा देना होगा।
- डॉग लवर्स को नसीहत: बेंच ने कहा कि जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, वे उन्हें अपने घर ले जाएं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब किसी मासूम पर हमला होता है, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
- अदालतों में हमला: जस्टिस मेहता ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब नगर निगम अधिकारी कुत्तों को पकड़ने गए, तो वकीलों (तथाकथित कुत्ता प्रेमियों) ने उन पर हमला कर दिया।
अहम दलीलें और तथ्य:
- वन्यजीवों को खतरा: दातार ने बताया कि लद्दाख में 55,000 आवारा कुत्तों के कारण 9 वन्यजीव प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं। रणथंभौर के बाघ भी कुत्तों से फैलने वाले एक लाइलाज वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।
- सार्वजनिक स्थानों पर अधिकार: एडवोकेट ने तर्क दिया कि मद्रास हाईकोर्ट के अनुसार सड़कों पर जनता को आने-जाने का अधिकार है और वहां कुछ भी अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि 7 नवंबर के आदेश को एयरपोर्ट्स पर भी लागू किया जाए।
- बहुमत का सवाल: जस्टिस मेहता ने सवाल किया कि यदि किसी सोसाइटी (RWA) में 95% लोग कुत्ते नहीं चाहते, तो क्या 5% की मर्जी चलेगी? एडवोकेट दातार ने जवाब दिया कि यह बहुमत का नहीं बल्कि सुरक्षा का सवाल है।
सुरक्षा को लेकर कोर्ट के निर्देश:
- संस्थानों की सुरक्षा: शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल परिसर, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों के भीतर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को असुरक्षित माना गया है। कोर्ट ने कहा कि लोग इन जगहों पर काम से जाते हैं, कुत्तों को खाना खिलाने नहीं।
- जवाबदेही: कोर्ट ने उन संगठनों पर सवाल उठाए जो कुत्तों को खाना खिलाते हैं लेकिन हमलों की जिम्मेदारी नहीं लेते। बेंच ने साफ किया कि अब इस समस्या से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं।
- सड़कों पर डर: सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि कुत्तों के कारण लोग सुबह सूरज निकलने से पहले सड़कों पर चलने से डरते हैं।