नई दिल्ली: भारतीय रेलवे अब केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृतियों का प्रदर्शन केंद्र बन गया है। ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ पहल के माध्यम से रेलवे स्टेशनों को क्षेत्रीय विरासत के ‘डिस्प्ले हब’ में बदल दिया गया है। यह योजना उन पारंपरिक शिल्पों को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर थे।
क्षेत्रीय विविधता का संगम: यात्रियों को अब यात्रा के दौरान ही भारत के विभिन्न कोनों की झलक मिल जाती है। जहाँ पूर्वोत्तर भारत के स्टेशनों पर हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तन और बांस की कलाकृतियाँ यात्रियों को आकर्षित कर रही हैं, वहीं अन्य क्षेत्रों में स्थानीय मसाले, हथकरघा वस्त्र और पारंपरिक मिठाइयों की महक बिखरी हुई है। वाणिज्य और संस्कृति का यह अनूठा संगम न केवल यात्रियों के अनुभव को यादगार बना रहा है, बल्कि भारत की स्थानीय कला को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के माध्यम से एक नई पहचान दे रहा है।