मुंबई/नई दिल्ली: केंद्रीय बजट पेश होने के बाद आज यानी 1 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सरकार द्वारा फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने के फैसले से निवेशक घबरा गए, जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स 1,546 अंक (करीब 2%) गिरकर 80,722 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में भी 495 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,825 पर आ गया।
7 साल की सबसे बड़ी गिरावट: यह गिरावट बीते सात वर्षों में बजट के दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले साल 2020-21 के बजट पर सेंसेक्स 987 अंक और निफ्टी 300 अंक गिरा था। आज कारोबार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब सेंसेक्स अपने ऊपरी स्तर से 2,370 अंक नीचे गिरकर 79,899 तक पहुँच गया था।
सेक्टर का हाल: सबसे बुरा असर सरकारी बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा, जहाँ 6% की भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 27 लाल निशान में बंद हुए। BEL, SBI और अडाणी पोर्ट्स जैसे दिग्गजों के शेयर 6% तक टूट गए। इसके अलावा मेटल, एफएमसीजी (FMCG), फार्मा और रियल्टी सेक्टर में भी चौतरफा बिकवाली रही।
शेयर बाजार के लिए रविवार का दिन ब्लैक संडे साबित हुआ। बाजार गिरने की मुख्य वजह बजट में घोषित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की नई दरें हैं। सरकार ने ट्रेडिंग लागत बढ़ाकर सट्टेबाजी और अत्यधिक ट्रेडिंग पर लगाम लगाने की कोशिश की है, जिसका बाजार ने नकारात्मक स्वागत किया।
टैक्स ढांचे में बदलाव का गणित:
सरकार ने निम्नलिखित तीन प्रमुख बदलाव किए हैं:
- फ्यूचर्स ट्रेडिंग: टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया।
- ऑप्शंस प्रीमियम: इसे 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
- ऑप्शंस एक्सरसाइज: एक्सपायरी पर सेटलमेंट टैक्स को 0.125% से बढ़ाकर 0.15% किया गया।
व्यापारियों पर प्रभाव: चूंकि STT एक डायरेक्ट टैक्स है जो सौदे की कुल वैल्यू पर कटता है (चाहे मुनाफा हो या घाटा), लागत बढ़ने से इंट्राडे और हाई-वैल्यू ट्रेडर्स के मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। यही कारण रहा कि सुबह 100 अंक की मामूली गिरावट के साथ खुला बाजार बजट भाषण के दौरान और बाद में ताश के पत्तों की तरह ढह गया।