नई दिल्ली: भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने भविष्य के युद्धों की तैयारी की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। डीआरडीओ द्वारा विकसित ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (SFDR) का सफल परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय वायुसेना की आगामी मिसाइलें न केवल तेज होंगी, बल्कि उनकी मारक क्षमता की सीमा भी अब काफी बढ़ जाएगी। रैमजेट तकनीक मिसाइल को सुपरसोनिक गति (ध्वनि से तेज) बनाए रखने में मदद करती है, जिससे दुश्मन के विमानों के लिए बचना लगभग असंभव हो जाता है।
परीक्षण प्रक्रिया के तहत, मिसाइल को पहले ग्राउंड बूस्टर मोटर के जरिए एक विशिष्ट मैक नंबर (गति) तक पहुंचाया गया, जिसके बाद रैमजेट इंजन ने कमान संभाली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर वैज्ञानिकों और उद्योग जगत की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की ओर एक मजबूत कदम बताया। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी टीम के प्रयासों की सराहना की और इस तकनीक को हवाई सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति करार दिया।
इस परीक्षण की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समय और स्थान: 03 फरवरी, 2026, सुबह 10:45 बजे, चांदीपुर (ओडिशा)।
- महत्व: यह तकनीक लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को और अधिक घातक बनाएगी।
- प्रदर्शन: बूस्टर मोटर और फ्यूल कंट्रोलर सहित सभी प्रणालियों ने उम्मीद के मुताबिक काम किया।
- विशेष उपलब्धि: भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास यह एडवांस्ड रैमजेट तकनीक उपलब्ध है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने वैज्ञानिकों की इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी है। यह तकनीक भारतीय सशस्त्र बलों को सीमाओं पर रणनीतिक बढ़त दिलाएगी।