आस्था के साथ आत्मनिर्भरता की ओर मध्यप्रदेश: धार्मिक पर्यटन से खुलेंगे रोजगार के द्वार, 315 करोड़ के नए ‘लोक’ प्रस्तावित

आस्था के साथ आत्मनिर्भरता की ओर मध्यप्रदेश: धार्मिक पर्यटन से खुलेंगे रोजगार के द्वार, 315 करोड़ के नए ‘लोक’ प्रस्तावित

विवरण: मध्यप्रदेश सरकार सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के साथ-साथ इसे आर्थिक समृद्धि का आधार बना रही है। राज्य सरकार ने भविष्य के लिए 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 3 नए और 2 द्वितीय चरण के लोकों की योजना बनाई है।

आगामी और प्रस्तावित योजनाएं:

  • नया निर्माण: ओंकारेश्वर में ‘ममलेश्वर लोक’, बैतूल में ‘ताप्ती लोक’ और मैहर में ‘माँ शारदा लोक’ का निर्माण प्रस्तावित है।
  • विस्तार कार्य: महेश्वर में 110 करोड़ की लागत से ‘देवी अहिल्या लोक’ और अमरकंटक में ‘माँ नर्मदा लोक’ का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा।
  • आर्थिक प्रभाव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन से ये स्थल वैश्विक पर्यटन केंद्र बनेंगे। इससे हस्तशिल्पियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे। यह ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मध्यप्रदेश में चल रहे सांस्कृतिक महायज्ञ के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • कुल निवेश: 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 लोकों का निर्माण।
  • पूर्ण हो चुके कार्य: भगवान पशुपतिनाथ लोक (मंदसौर), वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक (भोपाल), भगवान परशुराम लोक (जानापाव) और देवी अहिल्या संग्रहालय (महेश्वर)।
  • प्रगतिरत कार्य (17 लोक): संत रविदास लोक (सागर) – लागत 101 करोड़, श्रीरामराजा लोक (ओरछा) और देवी लोक (सलकनपुर)।
  • आगामी लक्ष्य: ताप्ती लोक (बैतूल), माँ शारदा लोक (मैहर) और ममलेश्वर लोक (ओंकारेश्वर)।
  • उद्देश्य: भावी पीढ़ियों के लिए गौरवशाली परंपराओं का संरक्षण और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय रोजगार का सृजन।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन लोकों को पत्थर-ईंटों के निर्माण से परे ‘समरसता और ऊर्जा का केंद्र’ बताया है, जो आधुनिक भारत में मध्यप्रदेश की विशिष्ट पहचान स्थापित करेंगे।

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