नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सदन को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
ऑपरेशन और सुरक्षा उपाय: विदेश मंत्री ने बताया कि वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ को तेज कर दिया गया है। 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई ‘कैबिनेट सुरक्षा समिति’ (CCS) की बैठक में ईरान और अन्य खाड़ी देशों में हुए हमलों के बाद के हालातों की समीक्षा की गई। बैठक में न केवल नागरिकों की सुरक्षा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और छात्रों की परीक्षाओं पर पड़ रहे असर पर भी चर्चा हुई।
कूटनीतिक रुख: डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है। उन्होंने 28 फरवरी और 3 मार्च के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने युद्ध के कारण हो रहे जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया।