नई दिल्ली: मंगलवार को भारतीय संसद के निचले सदन में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद, पीठासीन अधिकारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
विपक्ष के गंभीर आरोप: चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने स्पीकर पर पक्षपात करने का सीधा आरोप लगाया। गोगोई ने कहा कि बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कम से कम 20 बार बोलने से रोका गया और बार-बार रूलिंग बुक का हवाला देकर उनके भाषण में बाधा डाली गई। उन्होंने सत्ता पक्ष पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ विपक्ष को लेख (आर्टिकल) पढ़ने से रोका गया, वहीं सत्ता पक्ष के सांसदों को सदन में प्रतिबंधित किताबें दिखाने की छूट दी गई।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को सबूत देने के नाम पर टोका गया और 9 फरवरी को शशि थरूर का माइक बंद कर दिया गया। इसके अलावा, ओम बिरला द्वारा महिला सांसदों पर पीएम की चेयर घेरने के पुराने आरोपों को गौरव गोगोई ने ‘शर्मनाक’ करार दिया। मंगलवार को करीब 7 घंटे तक चली तीखी बहस के बाद सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।