संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने ईरान द्वारा खाड़ी देशों और जॉर्डन पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के विरुद्ध बहरीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को बहुमत से पारित कर दिया है। 15 सदस्यीय परिषद में से 13 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। पाकिस्तान ने भी भारत के पड़ोसी क्षेत्र में अस्थिरता का हवाला देते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।
प्रमुख बिंदु:
- नुकसान का विवरण: बहरीन के प्रतिनिधि जमाल फारिस अलरोवैई ने बताया कि जीसीसी देशों ने ईरान द्वारा दागी गई 954 मिसाइलों और 2,500 ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है। इन हमलों में 25 देशों के नागरिक प्रभावित हुए हैं।
- यूएई का रुख: यूएई के प्रतिनिधि मोहम्मद अबूशहाब ने स्पष्ट किया कि उनके देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं हुआ था, फिर भी तेहरान ने उनके नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।
- अंतरराष्ट्रीय कानून: प्रस्ताव में इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया गया है। साथ ही, अनुच्छेद 51 के तहत देशों के ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ की पुष्टि की गई है।
तेहरान ने इस कार्यवाही पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सुरक्षा परिषद का ‘खुलेआम दुरुपयोग’ करार दिया है।