एलपीजी की कालाबाजारी पर सरकार का कड़ा प्रहार: कमर्शियल गैस के लिए 20% कोटा तय, तीन सदस्यीय समिति करेगी निगरानी

एलपीजी की कालाबाजारी पर सरकार का कड़ा प्रहार: कमर्शियल गैस के लिए 20% कोटा तय, तीन सदस्यीय समिति करेगी निगरानी

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि एलपीजी आपूर्ति को लेकर झूठे आख्यान गढ़े जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि गैस की डिलीवरी का औसत समय संकट से पहले की तरह 2.5 दिन ही बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ जगहों पर ‘पैनिक बुकिंग’ (घबराहट में बुकिंग) के कारण समस्या दिख रही है, न कि वास्तविक कमी की वजह से।

महत्वपूर्ण आंकड़े और तथ्य:

उज्ज्वला योजना: सरकारी सब्सिडी के कारण उज्ज्वला लाभार्थियों पर अतिरिक्त बोझ प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम पड़ रहा है।पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में जानकारी दी कि कमर्शियल एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो देशभर में आपूर्ति की निगरानी कर रही है।

प्राथमिकता: अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है।

कमर्शियल गैस: मंत्री ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करने का लक्ष्य होटलों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सब्सिडी वाले सिलेंडर के अवैध उपयोग को रोकना है।

वैकल्पिक ऊर्जा: गैस पर दबाव कम करने के लिए सरकार अन्य ईंधन विकल्पों को भी बढ़ावा दे रही है।

प्रशासनिक कदम:

  1. कोटा प्रणाली: जमाखोरी रोकने के लिए आज से तेल कंपनियां औसत मासिक मांग का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित करेंगी।
  2. निगरानी तंत्र: तेल कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल को डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर तैनात किया गया है।
  3. राज्यों के साथ समन्वय: केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर स्थानीय प्रशासन को इस निगरानी व्यवस्था से जोड़ा है।
  4. घाटे की भरपाई: तेल कंपनियों को हुए 40,000 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।

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