नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस विषय को अत्यंत गंभीर करार दिया। सीजेआई ने टिप्पणी की कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में डेटा ‘नई करेंसी’ का रूप ले चुका है और इसकी सुरक्षा केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि देश का बड़ा डेटा विदेशों में जा रहा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि नया कानून आईटी एक्ट 2000 के विपरीत पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा पाने के अधिकार से वंचित करता है। अब मुआवजा पीड़ित के बजाय सरकार या बोर्ड को मिलेगा। साथ ही, उन्होंने डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की न्यायिक जवाबदेही और निगरानी की कमी पर भी सवाल उठाए। इस पर सीजेआई ने स्पष्ट किया कि किसी भी निगरानी निकाय को अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) होना चाहिए और वह हमेशा न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगा।