भारतीय नौसेना ने 2017 से जारी अपने ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत वैश्विक समुद्री मार्गों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। वर्तमान में दुनिया के छह अलग-अलग रणनीतिक इलाकों में भारतीय युद्धपोत तैनात हैं, जो न केवल समुद्री डकैती रोक रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता (एस्कॉर्ट) भी प्रदान कर रहे हैं।
प्रमुख ऑपरेशन और जहाजों की सुरक्षा: ओमान की खाड़ी में ‘ऑपरेशन संकल्प’ और अदन की खाड़ी में ‘एंटी-पायरेसी’ अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहे हैं। हाल ही में भारतीय नौसेना ने एलपीजी कैरियर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ के बाद तीसरे भारतीय जहाज ‘जग लाड़की’ को भी सुरक्षित क्षेत्र तक एस्कॉर्ट किया है। गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत ओमान की खाड़ी में मुस्तैदी से तैनात है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले मरीन ट्रैफिक पर पैनी नजर रखे हुए है।
ऊर्जा सुरक्षा का कवच: भारत का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार फारस और ओमान की खाड़ी से होता है। नौसेना की पहली तैनाती इसी मार्ग की सुरक्षा के लिए है। वहीं, अदन की खाड़ी में दूसरी तैनाती भारत के 90 प्रतिशत सामान्य व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जो स्वेज नहर और लाल सागर के रास्ते आता है।