आगामी विधानसभा चुनावों की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी प्रकार के राजनीतिक विज्ञापन को सार्वजनिक करने से पहले ‘मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी’ (MCMC) से प्री-सर्टिफिकेशन (पूर्व-प्रमाणन) लेना अनिवार्य होगा।
यह निर्देश असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में होने वाले उपचुनावों पर भी प्रभावी होंगे। आयोग ने साफ कर दिया है कि टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया, ई-पेपर, बल्क एसएमएस और सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर विज्ञापन जारी करने के लिए एम.सी.एम.सी की अनुमति लेना कानूनी रूप से आवश्यक है।चुनाव आयोग ने प्रचार के आधुनिक तरीकों पर नकेल कसने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की है। उम्मीदवारों और दलों को इन नियमों का पालन करना होगा:
- सोशल मीडिया का खुलासा: सभी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र (हलफनामे) में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है।
- प्रमाणन प्रक्रिया: जिला स्तर के उम्मीदवार जिला एम.सी.एम.सी में आवेदन करेंगे, जबकि राज्य मुख्यालय वाले दल राज्य स्तरीय एम.सी.एम.सी से अनुमति लेंगे। यदि एम.सी.एम.सी के फैसले से असंतोष है, तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता वाली अपीलीय समिति में गुहार लगाई जा सकती है।
- खर्च का हिसाब: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) के तहत, चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किए गए कुल खर्च का विवरण देना होगा। इसमें कंटेंट निर्माण, विज्ञापन भुगतान और सोशल मीडिया हैंडलिंग का खर्च शामिल है।
- पेड न्यूज पर लगाम: एम.सी.एम.सी संदिग्ध ‘पेड न्यूज’ के मामलों की निगरानी करेगी और उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।