लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि जो भी देश के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है और ऐसे तत्वों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।
अमित शाह ने अपने संबोधन में ‘रेड कॉरिडोर’ के हालात में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले यह क्षेत्र 12 राज्यों तक फैला हुआ था और देश के लगभग 70 प्रतिशत भूभाग को प्रभावित करता था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अब इन क्षेत्रों में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और नक्सलवाद तेजी से समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।
बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वहां नक्सलवाद अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है और विकास कार्यों ने गति पकड़ी है। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में स्कूल खोले गए हैं और राशन की दुकानों की व्यवस्था की गई है, जिससे स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिल रहा है।
इस दौरान उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर भी निशाना साधा। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक देश पर शासन किया, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि 70 वर्षों के दौरान इन इलाकों में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच सकीं।
गृह मंत्री ने 2014 के बाद केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए आवास, रसोई गैस, स्वच्छ पेयजल, 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा और मुफ्त राशन जैसी योजनाएं लागू की गईं। उनके अनुसार, पहले नक्सलवाद के कारण ये सुविधाएं बस्तर जैसे क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाती थीं, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
अंत में, अमित शाह ने विपक्ष को सलाह दी कि वह पहले अपने शासनकाल की समीक्षा करे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकारें आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, बैंकिंग सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में विफल रहीं।