राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने सोमवार को बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान सभागार में आरोग्य भारती द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन का आधार मन और इंद्रियों पर नियंत्रण है। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि प्रकृति ने मनुष्य को शरीर बनाने और बिगाड़ने, दोनों की शक्ति दी है, इसलिए प्राकृतिक जीवनशैली अपनाना अनिवार्य है।
राज्यपाल ने आयुर्वेद की महत्ता बताते हुए कहा कि यह प्रकृति प्रदत्त औषधियों का विज्ञान है, जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। उन्होंने गुजरात के डांग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की जनजातीय आबादी हरियाली और प्रकृति के करीब रहती है, जिसके कारण वहां सिकल सेल जैसे आनुवंशिक रोग बहुत कम पाए जाते हैं। उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए अधिक पानी पीने, कम तैलीय भोजन करने, पर्याप्त नींद लेने और मिलेट (मोटा अनाज) को आहार में शामिल करने की सलाह दी। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के श्री अशोक कुमार वार्ष्णेय और विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री एस.के. जैन भी उपस्थित थे।कार्यशाला की प्रमुख झलकियां:
- डांग क्षेत्र का केस स्टडी: राज्यपाल ने बताया कि कैसे प्रकृति के सानिध्य में रहने से जनजातीय समुदायों में गंभीर बीमारियों का प्रभाव कम होता है।
- समन्वयकारी दृष्टिकोण: आरोग्य भारती के प्रतिनिधि ने सलाह दी कि सभी चिकित्सा पद्धतियों के बीच समन्वय होना चाहिए और चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता के अनावश्यक दावों से बचना चाहिए।
- सांस्कृतिक प्रस्तुति: कार्यशाला के समापन पर संत हिरदाराम योग एंड नेचर केयर संस्थान और विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा मनमोहक योग नृत्यों की प्रस्तुति दी गई।
- परामर्श: राज्यपाल ने स्वस्थ जीवन के 4 स्तंभ बताए—पर्याप्त जल, कम तेल, 6 घंटे की नींद और मिलेट का सेवन।
इस अवसर पर कुलगुरु श्री एस.के. जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि यदि व्यक्ति प्रकृति के सिद्धांतों के अनुरूप जीवन व्यतीत करे, तो वह प्रदूषण और आधुनिक जीवनशैली से पैदा होने वाले रोगों से मुक्त रह सकता है।