NSE से खरीदे जा सकेंगे अमेरिकी कंपनियों के शेयर

अगर आप शेयरों में पैसा लगाने वाले खुदरा निवेशक हैं और विदेशी शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, तो आपकी यह इच्छा NSE के जरिए जल्द पूरी हो सकती है। आपको जल्द सस्ते में गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में इंडियन डीमैट एकाउंट के जरिए पैसा लगाने का मौका मिल सकता है।

अमेरिका में लिस्टेड कंपनियों में निवेश करने की सुविधा आपको गुजरात के इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विस सेंटर (IFSC) में NSE की गिफ्ट सिटी वाली यूनिट NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज के जरिए मिलेगी। NSE की यह यूनिट आपको दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों में फ्रैक्शनल ओनरशिप दिला सकेगी।

फ्रैक्शनल ओनरशिप में समूची सिक्योरिटी न खरीदकर उसका कुछ हिस्सा लिया जा सकता है। यानी अगर कंपनी का शेयर 100 डॉलर का है, तो एक डॉलर से एक शेयर के सौवें हिस्से के बराबर हिस्सेदारी लिया जा सकेगा। अमेरिकी शेयरों में निवेश करने के लिए गिफ्ट सिटी की ब्रोकरेज फर्म में डीमैट एकाउंट खोलना होगा।

NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज ने कहा है कि उसने बुनियादी सुविधाएं तैयार कर ली हैं और ब्रोकर्स का रजिस्ट्रेशन चल रहा है। अमेरिकी शेयरों की ट्रेडिंग, क्लीयरिंग, सेटलमेंट और होल्डिंग यानी खरीदारी से लेकर डिपॉजिटरी रिसीट के आपके डीमैट एकाउंट तक पहुंचाने का काम IFSC अथॉरिटी देखेगी। यह सुविधा रिजर्व बैंक के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत ऑफर की जाएगी।

अभी LSR के तहत कुछ शर्तों के साथ हर भारतीय ढाई लाख डॉलर (लगभग 1.86 करोड़ रुपए) तक सालाना विदेश भेज सकता है। इसके साथ शर्त यह है कि रकम का इस्तेमाल किसी लेवरेजिंग में नहीं किया जाएगा। यानी उसको किसी डेरिवेटिव प्रॉडक्ट में नहीं लगाया जा सकता और न ही उससे ट्रेडिंग की जा सकती है।

NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, ‘नई व्यवस्था से भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए अमेरिकी शेयर खरीदना किफायती हो जाएगा। यह निवेश अनस्पॉन्सर्ड डिपॉजिटरी रिसीट के रूप में किया जा सकेगा। इसे निवेशक गिफ्ट सिटी में खोले गए अपने डीमैट एकाउंट में रख सकेंगे।’

अनस्पॉन्सर्ड डिपॉजिटरी रिसीट एक तरह की सिक्योरिटी होती है, जो विदेशी कंपनी के शेयरों के आधार पर जारी की जाती है। इस रिसीट को जारी करने के लिए संबंधित कंपनी की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती।

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