डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52 लाख किलो दुग्ध संकलन का दिया लक्ष्य

डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52 लाख किलो दुग्ध संकलन का दिया लक्ष्य

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से डेयरी गतिविधियों को नई ऊंचाई पर ले जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री निवास के ‘समत्व’ भवन में आयोजित मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की द्वितीय बैठक के दौरान, उन्होंने घोषणा की कि ‘किसान कल्याण वर्ष’ में दुग्ध उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और पशुपालन मंत्री लखन पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि डेयरी विकास योजना के तहत प्रदेश के 26 हजार गांवों को जोड़कर प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध संकलन का लक्ष्य हासिल किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से दुग्ध संघों की कार्यक्षमता बढ़ी है, जिससे पशुपालकों को उनके दूध का बेहतर दाम मिलना सुनिश्चित हुआ है। डॉ. यादव ने डेयरी वैल्यू चैन के डिजिटलीकरण और नई प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया।

डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि राजधानी से लेकर ग्राम स्तर तक ब्रांडिंग और पैकेजिंग में भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने आदर्श पशुपालकों को जिला स्तर पर सम्मानित करने और दुधारू पशुओं की प्रदर्शनियां आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि युवाओं को आधुनिक डेयरी टेक्नोलॉजी के प्रति आकर्षित किया जा सके।

बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान 1752 नई सहकारी समितियों का गठन हुआ है और 701 बंद पड़ी समितियों को पुनर्जीवित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश का दुग्ध संकलन 9.67 लाख किलोग्राम प्रतिदिन तक पहुंच गया है। साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘मोबाइल ऐप’ के माध्यम से किसानों को गुणवत्ता और मूल्य की तत्काल जानकारी दी जा रही है।

अंत में, बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा करते हुए बताया गया कि इंदौर में 30 मीट्रिक टन का पाउडर प्लांट शुरू हो चुका है, जबकि शिवपुरी और ग्वालियर में डेयरी संयंत्रों का सुदृढ़ीकरण जारी है। प्रदेश में अब दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) लागू की गई है और पीपीपी मोड पर भी नए संयंत्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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