पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के चुनावी नतीजे घोषित हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक बार फिर इस सीट पर अपना परचम लहराते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार पवित्र कर को 9,665 मतों के अंतर से पराजित किया है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी को कुल 1,27,301 वोट प्राप्त हुए, जबकि टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर 1,17,636 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
नंदीग्राम का यह जनादेश न केवल एक क्षेत्र की जीत है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में भाजपा की मजबूत पकड़ को भी दर्शाता है। यह सीट हमेशा से बंगाल की सियासत का केंद्र रही है और यहाँ होने वाली हलचल पूरे प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को प्रभावित करती है। ज्ञात हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट ने सबको चौंका दिया था, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यहाँ से हार का स्वाद चखना पड़ा था।
इस सीट का ऐतिहासिक महत्व साल 2021 के चुनावों से और बढ़ गया था। उस समय ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का साहसी फैसला लिया था। उनका सामना उनके ही पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी से हुआ था, जो तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उस रोमांचक मुकाबले में सुवेंदु ने मुख्यमंत्री को 2,000 से भी कम मतों के मामूली अंतर से हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
नंदीग्राम के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो यहाँ अब तक 16 बार चुनाव हुए हैं। दशकों तक यह क्षेत्र भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का अभेद्य किला रहा, जिसने यहाँ 9 बार जीत दर्ज की। समय के साथ यहाँ कांग्रेस और टीएमसी ने भी अपनी पैठ बनाई, लेकिन भाजपा के लिए जीत का खाता 2021 में ही खुला। पूर्वी मिदनापुर जिले की यह सीट नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 ब्लॉक को मिलाकर बनी है और वर्तमान में तामलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
इस क्षेत्र की पहचान 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से भी जुड़ी है। तत्कालीन वामपंथी सरकार के केमिकल हब बनाने के फैसले के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में 14 ग्रामीणों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी के राजनीतिक उदय का मार्ग प्रशस्त किया था, जिसके परिणाम स्वरूप 2011 में बंगाल में 34 साल पुराने वाम शासन का अंत हुआ।
नंदीग्राम की सांख्यिकी इसे एक विशुद्ध ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र बनाती है, जहाँ लगभग 96.65 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है। यहाँ के सामाजिक समीकरणों में 23.60 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता और 16.46 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पिछले चुनावों में यहाँ 88.51 प्रतिशत तक मतदान दर्ज किया गया था, जो यहाँ की जनता की गहरी राजनीतिक चेतना का प्रमाण है।