भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने ‘कृषक कल्याण’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए गेहूँ उपार्जन की अवधि और केंद्रों पर कार्य संचालन के घंटों में विस्तार किया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि अब किसान 23 मई 2026 तक अपनी फसल बेच सकेंगे। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल पर्ची बनाने का समय रात 10 बजे तक और देयक (बिल) जारी करने की समय सीमा रात 12 बजे तक बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी किसान को केंद्रों पर अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
आंकड़ों को साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक राज्य के करीब साढ़े सात लाख किसानों से 39 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ खरीदा जा चुका है। किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से 6490.56 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 14.75 लाख किसानों ने अब तक पोर्टल पर अपने स्लॉट बुक किए हैं, जिसकी मॉनिटरिंग खाद्य विभाग द्वारा निरंतर की जा रही है ताकि सर्वर या तकनीकी स्तर पर कोई समस्या न आए।
व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए श्री राजपूत ने बताया कि प्रत्येक केंद्र पर अब 6 तौल कांटे उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा, जिलों को स्थानीय मांग के अनुसार संसाधनों में वृद्धि करने की छूट दी गई है। केंद्रों पर गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की सफाई के लिए आवश्यक मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उपार्जन के लिए जूट और एचडीपीई बैग्स का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है ताकि भंडारण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे।
समर्थन मूल्य की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि किसानों को केंद्र द्वारा निर्धारित 2585 रुपये के एमएसपी (MSP) के अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जा रहा है। इस प्रकार किसानों को उनकी उपज का 2625 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो रहा है। भंडारण के लिए आधुनिक गोदामों और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है ताकि उपार्जित अनाज की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहे।