खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, अमेरिका ने अपने नए समुद्री मिशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के स्वरूप को स्पष्ट किया है। पेंटागन ने जोर देकर कहा है कि यह अभियान पूरी तरह से रक्षात्मक और सीमित समय के लिए है, जिसका एकमात्र लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से कोई संबंध नहीं है और यह एक स्वतंत्र सुरक्षात्मक पहल है।
मंगलवार को आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त किया कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का उद्देश्य किसी देश पर हमला करना नहीं, बल्कि ईरानी खतरों के बीच व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह मिशन होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
रक्षा मंत्री ने मिशन की सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए ईरान की समुद्री सीमा या हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका संघर्ष की इच्छा नहीं रखता, लेकिन ईरान को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्दोष देशों के व्यापारिक जहाजों को रोकने या बाधित करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।
हेगसेथ ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह आर्थिक उगाही के लिए होर्मुज में हस्तक्षेप को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की प्रभावशीलता पहले ही साबित हो चुकी है, क्योंकि अमेरिकी विध्वंसक जहाजों (डिस्ट्रॉयर्स) की सुरक्षा में दो वाणिज्यिक जहाज सफलतापूर्वक इस क्षेत्र से गुजर चुके हैं। वर्तमान में अमेरिकी ‘सेंटकॉम’ (CENTCOM) सैकड़ों जहाजों और बीमा कंपनियों के साथ समन्वय कर रहा है ताकि उन्हें ईरानी दबाव से मुक्त किया जा सके।
अंत में, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इस सुरक्षा घेरे को प्रतीकात्मक रूप से ‘लाल, सफेद और नीला डोम’ (अमेरिकी ध्वज के रंग) करार दिया। उन्होंने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए अमेरिकी डिस्ट्रॉयर्स के साथ भारी संख्या में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और निगरानी ड्रोन तैनात किए गए हैं। हेगसेथ के अनुसार, यह कदम न केवल नाविकों की जान बचाएगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित कर दुनिया के सबसे गरीब वर्ग को महंगाई और कमी से भी बचाएगा।