उत्तर मैसिडोनिया की असेंबली में राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन: संसदीय सहयोग, लोकतंत्र और द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त बनाने का आह्वान

उत्तर मैसिडोनिया की असेंबली में राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन: संसदीय सहयोग, लोकतंत्र और द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त बनाने का आह्वान

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को स्कोप्ये स्थित उत्तर मैसिडोनिया की असेंबली को संबोधित करते हुए दोनों राष्ट्रों के बीच संसदीय संबंधों को प्रगाढ़ करने, लोकतांत्रिक आदर्शों को बढ़ावा देने और द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने पर बल दिया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत, उत्तर मैसिडोनिया को किसी सुदूर राष्ट्र के रूप में नहीं देखता, बल्कि एक संतुलित, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भागीदार मानता है।

राष्ट्रपति ने अपने वक्तव्य में कहा कि लोकतंत्र महज एक प्रशासनिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों को एक सूत्र में पिरोने वाली एक साझा आस्था है। उन्होंने उल्लेख किया कि दोनों देशों के विधायी सदन जन-स्वाधीनता के प्रहरी, विधि-निर्माण के प्रमुख केंद्र और राष्ट्रीय चेतना के सजीव प्रतीक हैं। उन्होंने संसदीय कूटनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के मध्य सतत संवाद से एक ऐसा मजबूत संस्थागत विश्वास निर्मित होता है, जो राजनीतिक बदलावों के बावजूद निरंतर बना रहता है।

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने दोनों देशों के युवा सांसदों से स्कोप्ये और नई दिल्ली के बीच संवाद का दायरा बढ़ाने की अपील की। उनका कहना था कि इस प्रकार की नियमित वार्ताओं से विधायी प्रक्रियाओं और लोक नीति निर्माण के उत्कृष्ट अनुभवों का आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी तालमेल और अधिक सुदृढ़ हो सकेगा।

वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र तेजी से परिवर्तित हो रहा है। इस संदर्भ में भारत, दक्षिण-पूर्वी यूरोप को नवाचार और आर्थिक प्रगति के एक नए केंद्र के रूप में देखता है। उन्होंने उत्तर मैसिडोनिया की रणनीतिक स्थिति की सराहना करते हुए उसे भूमध्य सागर, मध्य यूरोप और पूर्व-पश्चिम को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग बताया और कहा कि भारत व्यापार व निवेश के माध्यम से इस पूरे क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए तत्पर है।

वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने भारत के पारंपरिक दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में, जब संपूर्ण विश्व विभिन्न संघर्षों और आर्थिक असमानताओं से जूझ रहा है, यह प्राचीन विचार हमें दूरियां बढ़ाने के बजाय सहयोग और परस्पर विश्वास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर दिया कि साझा ऐतिहासिक विरासत और बेहतर भविष्य की सोच रखने वाले दोनों देशों को शांति व प्रगति के लिए मिलकर प्रयास करने चाहिए।

इस ऐतिहासिक संबोधन के अवसर पर उत्तर मैसिडोनिया की राष्ट्रपति डॉ. गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा तथा लोकसभा सांसद विजय बघेल भी संसद भवन में मौजूद थे।

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