मध्य प्रदेश में जल संकट के स्थायी समाधान और भू-जल स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस अभियान के अंतर्गत अब तक प्रदेश भर में 1,77,121 जल संरक्षण कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की पुरानी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार करना और वैज्ञानिक तरीकों से वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) की क्षमता को बढ़ाना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मजबूती मिल सके।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के सहयोग से इस व्यापक कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। राज्य सरकार ने इस मुहिम के तहत कुल 2,42,188 कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए 6,201.81 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए अब तक 4,443.85 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा चुकी है। इस पूरी कवायद का मूल मंत्र ‘खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में’ रोकना है, ताकि आने वाले मानसून में बारिश की एक-एक बूंद को सहेजा जा सके।
परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्यों का सूक्ष्म स्तर पर वर्गीकरण कर उनकी निरंतर निगरानी की जा रही है। सूखे कुओं को दोबारा क्रियाशील बनाने के लिए ‘डग वेल रिचार्ज’ तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके तहत 88,123 से अधिक कुओं को रिचार्ज करने का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही, गांवों में सिंचाई व्यवस्था और पशुपालन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 53,568 खेत तालाबों का निर्माण संपन्न कराया गया है। जल संवर्धन और पुनर्भरण से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी 27,332 कार्य पूरे किए गए हैं।
जल संरक्षण के अलावा इस अभियान में पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ा गया है। इसके तहत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करने के साथ-साथ विद्यालयों में पानी की टंकियों की स्वच्छता जैसे रचनात्मक कार्यों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, ‘जल संचयन जल भागीदारी’ (JSJB 2.0) पहल के अंतर्गत राज्य में 10 लाख से अधिक कार्यों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो इस अभियान में जनता की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जल संरक्षण का मुद्दा सीधे तौर पर समाज के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है और इस अभियान की सफलता जन-भागीदारी की वजह से ही संभव हो पा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार का मुख्य ध्येय इन स्थायी ढांचों के माध्यम से भूमिगत जल स्तर को ऊपर उठाना है। इससे भविष्य में पीने के पानी की किल्लत का स्थायी समाधान होगा और किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
अभियान के तहत जिलों की प्रगति को लेकर 14 मई, 2026 को जारी नवीनतम रैंकिंग के अनुसार, खंडवा जिला 7.51 अंकों के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है। खंडवा में अब तक शुरू किए गए 9,131 कार्यों में से 2,944 कार्य पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, जबकि 5,400 कार्यों की भौतिक पूर्णता दर्ज की गई है। इस सूची में 7.38 के स्कोर के साथ खरगोन जिला दूसरे पायदान पर है, जिसने 81.17 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर वित्तीय प्रगति (बुक्ड एक्सपेंडिचर) दिखाई है। इसके बाद क्रमशः बड़वानी (7.23 स्कोर) तीसरे, उज्जैन (7.08 स्कोर) चौथे और राजगढ़ (6.90 स्कोर) पांचवें स्थान पर काबिज हैं।