उत्तरी भारत के तीन प्रमुख पर्वतीय राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर—के जंगलों में भड़की वनाग्नि ने रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश के कसौली में आग के सैन्य और नागरिक क्षेत्रों के बेहद करीब पहुंचने के बाद आपातकालीन स्थिति में भारतीय वायुसेना की मदद ली जा रही है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भी हालात बिगड़ने के कारण गंगोत्री मार्ग पर स्थित एक गेस्ट हाउस से 70 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जो घने धुएं से घिर गए थे। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग का तांडव जारी है, जिससे पहाड़ों में वायु प्रदूषण और कम दृश्यता के कारण लोगों का दम घुट रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में अब तक वनाग्नि की 388 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें तीन लोगों की असमय मृत्यु हो गई है। राज्य का 340 हेक्टेयर से अधिक का हरा-भरा वन क्षेत्र इस आग की भेंट चढ़ चुका है। चमोली जिले के आदिबदरी में आग जंगलों से खेतों और बस्तियों तक आ पहुंची है, जबकि कालसी में एक विद्यालय परिसर भी इसकी चपेट में आ गया है। उत्तरकाशी के बड़ेथी में स्थिति बिगड़ने के कारण दिन के समय भी आसमान में धुंध छाई हुई है। वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने पौड़ी में जंगलों में आग लगाने के संदेह में दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में आने वाले कसौली वन क्षेत्र (कसौली बीट) में 26 मई की दोपहर से शुरू हुआ अग्निकांड पिछले 27 घंटों से अनवरत जारी है। इस घटना में अब तक 10 हेक्टेयर वन भूमि जल चुकी है। जब आग रिहायशी मकानों और सेना के प्रतिष्ठानों के नजदीक पहुंचने लगी, तो केंद्र सरकार के निर्देश पर वायुसेना ने मोर्चा संभाला। वायुसेना के चार अत्याधुनिक एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने प्रभावित पहाड़ी ढलानों पर रात के अंधेरे में भी उड़ान भरी और लगभग 62,500 लीटर पानी बरसाकर आग की विभीषिका को कम करने का प्रयास किया।
जम्मू-कश्मीर के रामनगर फॉरेस्ट डिवीजन सहित उधमपुर के उत्तरी वनों में पिछले चार दिनों से आग का कहर जारी है। तेज हवाओं के थपेड़ों के कारण आग तेजी से नए इलाकों को अपनी चपेट में ले रही है, जिससे कई सीमावर्ती गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और ग्रामीणों में डर का माहौल है। भौगोलिक रूप से बेहद कठिन और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण दमकल कर्मियों को मौके पर पहुंचने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय नागरिक मिलकर आग को फैलने से रोकने के लिए लगातार सामूहिक प्रयास कर रहे हैं।