डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने बेहद पेचीदा बताया है। कांगो की राजधानी किंशासा पहुंचे डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्रों में जारी हिंसक संघर्ष, असुरक्षा का माहौल, बड़े पैमाने पर विस्थापन, खाद्य संकट और स्थानीय जनता में फैला अविश्वास इस घातक बीमारी पर काबू पाने के प्रयासों में बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। गुरुवार देर रात पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने कांगो के नागरिकों को आश्वस्त किया कि वे इस आपदा में खुद को तन्हा न समझें, क्योंकि डब्ल्यूएचओ उनकी सहायता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुस्तैद है।
डब्ल्यूएचओ की विशेष टीमें इस समय पूर्वी इतुरी प्रांत के मुख्य शहर बुनिया में जमीनी स्तर पर राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। महानिदेशक टेड्रोस ने खुद हालात की समीक्षा करने के लिए शुक्रवार को वहां का दौरा करने की बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य टकराव और असुरक्षित परिस्थितियां स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के काम को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं। लगातार हो रहे हिंसक हमलों को देखते हुए उन्होंने एक बार फिर संघर्षविराम की पुरजोर वकालत की है, ताकि चिकित्सा सहायता सुचारू रूप से पहुंचाई जा सके।
विभिन्न राष्ट्रों द्वारा कांगो से आने वाले मुसाफिरों पर लगाए जा रहे यात्रा प्रतिबंधों पर डब्ल्यूएचओ ने असहमति जताई है। संगठन के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि डब्ल्यूएचओ ऐसे किसी भी प्रतिबंध का समर्थन नहीं करता, क्योंकि ये कदम वायरस की रफ्तार को सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही धीमा कर सकते हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह रोक नहीं सकते। उनके अनुसार, इस महामारी से निपटने का सबसे कारगर उपाय यही है कि संक्रमण के मूल स्रोत वाले इलाकों में ही रोकथाम के इंतजाम कड़े किए जाएं और वहां के निवासियों को हर मुमकिन मदद दी जाए।
टेड्रोस ने आगाह किया कि यात्रा पर पाबंदियां लगाने से वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई देश पूरी पारदर्शिता के साथ बीमारी के आंकड़े साझा करता है और बदले में उसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है, तो भविष्य में अन्य देश समय पर ऐसी संवेदनशील जानकारियां देने से कतराने लगेंगे।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस नए संक्रमण के कारण अब तक 1,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 238 मरीजों की संदिग्ध मौत हो चुकी है। यह जानलेवा बीमारी देश के पूर्वी हिस्सों में लगातार पैर पसार रही है।
यह कांगो में सामने आया इबोला का 17वां प्रकोप है, जिसमें प्रयोगशाला जांच के दौरान वायरस का बेहद दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन पाया गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने बीते 17 मई को इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया था, जिसके बाद अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी महाद्वीपीय स्तर पर हेल्थ इमरजेंसी लागू कर दी थी।