मध्यप्रदेश: जनगणना 2027 के पहले चरण का फील्ड वर्क पूरा, 30 मई को समाप्त हुआ मकानों की गिनती का अभियान

मध्यप्रदेश: जनगणना 2027 के पहले चरण का फील्ड वर्क पूरा, 30 मई को समाप्त हुआ मकानों की गिनती का अभियान

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना (एचएलओ) का मैदानी कार्य 30 मई 2026 को पूरा कर लिया गया है। प्रदेश में इस व्यापक शासकीय अभियान की शुरुआत 1 मई 2026 को हुई थी, जिसके तहत प्रगणक दलों ने सभी ग्रामीण और शहरी इलाकों में घर-घर पहुंचकर रिहायशी मकानों और उनमें निवास करने वाले परिवारों से संबंधित आवश्यक आंकड़े जुटाए।

इस डिजिटल सर्वे के दौरान भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 विशिष्ट प्रश्नों की मदद से मकानों के प्रकार, वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं और परिसंपत्तियों से जुड़े विवरणों को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से संकलित किया गया। यह पूरी जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से पेपरलेस और डिजिटल माध्यमों पर केंद्रित रही। फील्ड वर्क की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक समर्पित पोर्टल का उपयोग किया गया, जिससे इस पूरे काम में पारदर्शिता, शुद्धता और गति बनी रही।

प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए गृह सचिव एवं नोडल अधिकारी (जनगणना कार्य) श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि राज्य के सभी 55 जिलों, 449 तहसीलों और 425 नगरीय निकायों के तहत आने वाले 54 हजार 923 गांवों में इस गणना कार्य को फैलाया गया था। इस काम के लिए गठित किए गए गणना ब्लॉकों में 1 लाख 44 हजार से अधिक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक बैकअप के तौर पर 15 हजार अतिरिक्त कर्मियों को रिजर्व स्टाफ के रूप में भी रखा गया था। निश्चित अवधि के भीतर इस विशाल कार्य का पूरा होना सुदृढ़ प्रशासनिक प्रबंधन और जनभागीदारी का परिणाम है।

एकत्रित की गई जानकारियों की गोपनीयता को लेकर नोडल अधिकारी ने आश्वस्त किया कि नागरिकों द्वारा साझा किया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 के कानूनी प्रावधानों के तहत इन जानकारियों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इन सांख्यिकीय आंकड़ों का प्रयोग मात्र लोक कल्याणकारी नीतियों के निर्धारण और विकास की रूपरेखा तैयार करने के लिए होगा। केंद्र सरकार द्वारा पूरी प्रक्रिया के समापन के बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अधिकारिक आंकड़े जारी किए जाएंगे।

गौरतलब है कि जमीनी सर्वे शुरू होने से पहले राज्य सरकार ने नागरिकों को ऑनलाइन जानकारी भरने की सुविधा भी दी थी। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित इस ‘स्व-गणना’ (सेल्फ इन्यूमरेशन) के दौर में राज्य के 7 लाख से ज्यादा परिवारों ने डिजिटल माध्यम से अपनी प्रविष्टियां स्वयं दर्ज कीं, जो जागरूक नागरिकता का एक बड़ा उदाहरण है।

अब इस अभियान के अगले हिस्से के रूप में दूसरे चरण की शुरुआत की जाएगी। जनगणना 2027 के इस द्वितीय चरण में जनसंख्या की मुख्य गणना (पीई) का कार्य फरवरी 2027 में शुरू होगा। इस दौरान परिवारों के सभी सदस्यों के व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहलुओं से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे।

इस वृहद कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में स्थानीय जिला प्रशासन, जनगणना से जुड़े अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और प्रगणकों के साथ-साथ आम जनता का भी विशेष योगदान रहा। इसके अलावा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया द्वारा किए गए प्रचार-प्रसार से लोगों में जागरूकता बढ़ी, जिससे इस काम को गति मिली।

जनगणना कार्य निदेशक (मध्यप्रदेश) श्री संजीव श्रीवास्तव और गृह सचिव श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने प्रथम चरण के समयबद्ध और सफल संचालन के लिए राज्य के नागरिकों, शासकीय अधिकारियों, फील्ड कर्मचारियों और मीडिया कर्मियों का आभार प्रकट किया है। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में भी राज्य की जनता का ऐसा ही सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे इस राष्ट्रीय महत्व के मिशन को पूरा किया जा सके।

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