रविवार को भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान सीधे किसानों तक पहुँचाने की व्यवस्था करें। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ प्रसारण को सामूहिक रूप से सुनने के लिए किया गया था, जिसमें कृषि कल्याण संचालक श्री उमाशंकर भार्गव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने सुझाव दिया कि संस्थान द्वारा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कृषकों को केंद्र में आने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। यहाँ किसानों को उनकी आर्थिक क्षमता और खेतों की आवश्यकता के हिसाब से उपयोगी एवं आधुनिक यंत्रों की जानकारी दी जाए। साथ ही, उन्हें इन उपकरणों को चलाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिले ताकि वे आत्मनिर्भर होकर इनका उपयोग कर सकें। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह महज एक रेडियो प्रसारण नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे देश की सामूहिक इच्छाशक्ति, शक्ति और चेतना का जीवंत प्रतीक है।
श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले उन गुमनाम नायकों के योगदान को सामने लाते हैं, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से समाज में बड़े बदलाव किए हैं। यह आयोजन हमें सिखाता है कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता। जब पूरा देश एक ही दिशा में सोचता है और सामूहिक चेतना के साथ आगे बढ़ता है, तो बड़े से बड़ा परिवर्तन भी सहजता से संभव हो जाता है।
किसानों के कल्याण को केंद्र और राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए राज्यपाल ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे बदलते मौसम के दुष्प्रभावों से फसलों को बचाने और उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अन्नदाताओं की मदद करें। कार्यक्रम में महिला किसानों की मौजूदगी पर प्रसन्नता जताते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकारें किसानों के सर्वांगीण विकास और उनकी आय में वृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में कृषि को फायदे का सौदा बनाने के लिए कई नई योजनाएं लागू की गई हैं। इसी दिशा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 3 करोड़ ‘ड्रोन दीदी’ तैयार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कृषि कल्याण वर्ष के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की।
अपने गृह राज्य गुजरात के संस्मरण साझा करते हुए राज्यपाल ने बताया कि वे नवसारी के रहने वाले हैं, जहाँ एक प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में ऐतिहासिक ‘कृषि मेलों’ की शुरुआत की थी। इस पहल के तहत वैज्ञानिकों को ‘लैब से फील्ड’ (प्रयोगशाला से खेत) भेजा गया ताकि वे सीधे किसानों से संवाद कर सकें। इन्हीं मेलों के कारण गुजरात में केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट) के उपयोग को बढ़ावा मिला और जैविक खेती सुदृढ़ हुई। देश के महान कृषि वैज्ञानिक स्वर्गीय डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन ने भी गुजरात में एक महीने रहकर इन मेलों के दूरगामी और सकारात्मक प्रभावों का अध्ययन किया था।
मुख्य कार्यक्रम से पहले राज्यपाल श्री पटेल ने संस्थान में विकसित किए गए आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों की हौसलाअफजाई करते हुए किसानों के लिए उपयोगी इन आविष्कारों पर प्रसन्नता व्यक्त की।
इस भव्य आयोजन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और आई.सी.ए.आर. (ICAR) गान के साथ हुई। संस्थान के निदेशक श्री सी.आर. मेहता ने स्वागत भाषण देते हुए केंद्र की उपलब्धियों और नए अनुसंधानों की जानकारी दी, जबकि परियोजना समन्वयक श्री के.एन. अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत उपस्थित किसानों को उन्नत कृषि किट भी वितरित किए गए।