मई 2026 में जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा, सालाना आधार पर 3.2% की बढ़ोतरी दर्ज

मई 2026 में जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा, सालाना आधार पर 3.2% की बढ़ोतरी दर्ज

केंद्र सरकार द्वारा 1 जून को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 के दौरान देश का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। हालांकि यह आंकड़ा अप्रैल महीने के 2.42 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की तुलना में 20 फीसदी की गिरावट दर्शाता है, लेकिन पिछले वर्ष की समान अवधि यानी मई 2025 के 1.88 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें 3.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

इस महीने के राजस्व संग्रह में मुख्य हिस्सेदारी आयातित वस्तुओं की रही। वार्षिक आधार पर समीक्षा की जाए तो आयात से होने वाला ग्रॉस जीएसटी रेवेन्यू 19.1 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 59,654 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके विपरीत, घरेलू मोर्चे पर कारोबारी गतिविधियों से प्राप्त होने वाले राजस्व में कमी देखी गई और ग्रॉस डोमेस्टिक कलेक्शन 2.6 फीसदी घटकर 1.35 लाख करोड़ रुपये रह गया।

यदि शुद्ध कर संग्रह (नेट बेसिस) के नजरिए से देखें तो आयात पर होने वाला जीएसटी कलेक्शन 19.7 प्रतिशत की तेजी के साथ 49,403 करोड़ रुपये रहा। वहीं दूसरी ओर, शुद्ध घरेलू कर राजस्व में 2.3 प्रतिशत की मंदी दर्ज की गई, जिसके बाद यह आंकड़ा 1.18 लाख करोड़ रुपये पर सिमट गया।

चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती रुझान सकारात्मक बने हुए हैं। वित्त वर्ष के पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) के संयुक्त आंकड़ों को मिलाया जाए तो कुल ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 6.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4.37 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसी प्रकार, इस शुरुआती दो महीनों की अवधि में नेट जीएसटी रेवेन्यू भी 5.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 3.78 लाख करोड़ रुपये रहा।

विगत वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में हर महीने हुए कर संग्रह की स्थिति भी स्पष्ट की गई है। पिछले वित्त वर्ष की शुरुआत अप्रैल में 2.23 लाख करोड़ रुपये से हुई थी, जिसके बाद मई में 2.01 लाख करोड़, जून में 1.85 लाख करोड़ और जुलाई में 1.96 लाख करोड़ रुपये का संग्रह हुआ। इसके बाद अगस्त में 1.86 लाख करोड़, सितंबर में 1.89 लाख करोड़, अक्टूबर में 1.96 लाख करोड़ और नवंबर में 1.70 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आए। वर्ष के अंत में दिसंबर में 1.74 लाख करोड़, जनवरी में 1.93 लाख करोड़, फरवरी में 1.83 लाख करोड़ और मार्च में यह आंकड़ा 2.00 लाख करोड़ रुपये पर बंद हुआ था।

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