मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार शाम को भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह’ को संबोधित किया। 27 मई से 2 जून तक चले इस गरिमामयी कार्यक्रम में उन्होंने राज्य की जल संरचनाओं के पुनरुद्धार और भविष्य के जल प्रबंधन की रूपरेखा सामने रखी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचारों और कुशल मार्गदर्शन की वजह से आज मध्यप्रदेश जल संचयन के क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रहा है। केंद्र सरकार के प्रोत्साहन और अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं की स्वीकृति से राज्य को भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में इस साल गुड़ी पड़वा के पावन अवसर से ही ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का संचालन किया जा रहा है। इस व्यापक मुहिम के अंतर्गत राज्य के लगभग 3.5 लाख कुओं, प्राचीन बावड़ियों, तालाबों और जलाशयों को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आम जनता के सहयोग और जनभागीदारी के बल पर इस अभियान के बेहद सकारात्मक और दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण पर केंद्रित विभिन्न प्रदर्शनियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) के सहयोग से यहां भूगर्भीय जल स्रोत, जलीय जीवन और जल गंगा संवर्धन अभियान पर आधारित लघु चित्रों की प्रदर्शनियां लगाई गई थीं। इसके साथ ही ‘वीर भारत न्यास’ और ‘मेपकास्ट’ द्वारा तैयार की गई ‘अंतर्जलि यात्रा’ और जिलों के भूजल एटलस जैसे महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। इस वैश्विक महत्व के कार्यक्रम में फिजी, साइप्रस और मैक्सिको जैसे विभिन्न देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की भौगोलिक संपन्नता का जिक्र करते हुए कहा कि विंध्याचल और सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाएं ईश्वर की अनमोल देन हैं, जहां के वनांचलों से निकलने वाली जलधाराएं नदियों को जीवन देती हैं। उन्होंने नर्मदा, ताप्ती, बेतवा और चंबल जैसी नदियों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि चंबल देश की सबसे स्वच्छ नदियों में शुमार है, जिसके कारण वहां सर्वाधिक घड़ियाल पाए जाते हैं। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए राजा भोज के काल की उन्नत तकनीक और भोपाल की बड़ी झील का उदाहरण दिया, जहां बिना किसी नुकसान के जल संग्रहण और अतिरिक्त पानी की निकासी की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने आयोजक संस्था ‘वीर भारत न्यास’ और उनके सहयोगियों को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस विशिष्ट समारोह में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, केंद्रीय भू-जल बोर्ड के प्रतिनिधि अशोक विश्वास, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी और वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी सहित भारी संख्या में शोधार्थी, छात्र और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित थे।