केंद्र सरकार ने देश के स्कूली छात्रों को परीक्षा के तनाव, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और आधुनिक जीवनशैली के मानसिक दबाव से बचाने के लिए एक नई राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति का मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्तावित नीति को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और नीति समिति के सदस्यों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में एक ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना है, जहां बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को समान प्राथमिकता मिल सके।
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रों, शिक्षकों और पूरे स्कूल प्रशासन के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए तात्कालिक उपायों के बजाय एक दीर्घकालिक और निवारक दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मानसिक कल्याण को केवल समस्याओं के इलाज तक सीमित न रखकर एक सकारात्मक जीवनशैली के रूप में विकसित किया जाए।
धर्मेंद्र प्रधान ने नीति की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए कहा कि स्कूलों में एक ऐसा समावेशी, सहयोगात्मक और सुरक्षित वातावरण होना चाहिए जो बच्चों में आपसी विश्वास, सहानुभूति और भावनात्मक संवेदनशीलता को बढ़ावा दे। उनके अनुसार, मानसिक रूप से सुदृढ़ छात्र ही बेहतर शैक्षणिक परिणाम दे सकते हैं, इसलिए इसे विद्यालयी शिक्षा की मुख्य कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं का एक अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना बेहद जरूरी है।
समीक्षा के दौरान कई प्रमुख शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इस नई नीति का आधार भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और व्यावहारिक जीवन दर्शन पर केंद्रित होना चाहिए, ताकि इसे जमीनी स्तर पर आसानी से लागू किया जा सके। इसके साथ ही, इस नीति के तहत शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है, जिससे वे छात्रों की शुरुआती मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को पहचानकर प्रथम स्तर के मार्गदर्शक के रूप में उनकी मदद कर सकें।