केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते होने वाली मादक पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्ययोजना तैयार की है। शनिवार को अगरतला के पास शालबागान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के त्रिपुरा फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, उन्होंने सीमावर्ती इलाकों के नागरिकों को प्रशिक्षित और जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमा की सुरक्षा सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों का काम नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र का एक साझा उत्तरदायित्व है, जिसके लिए स्थानीय नागरिकों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
इस रणनीतिक बैठक में गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सीमावर्ती आबादी के लिए विशेष जागरूकता और प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन करें। इन शिविरों में स्थानीय पटवारी, राज्य पुलिस और बीएसएफ के जवानों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि समन्वय बेहतर हो सके। इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए अमित शाह ने निर्देश दिया कि गृह मंत्रालय के सीसीटीवी मॉडल को सर्वप्रथम त्रिपुरा में क्रियान्वित किया जाए। इसके तहत बीएसएफ के मौजूदा कैमरों को आधुनिक तकनीक से लैस करके सीधे जिला प्रशासन के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा, जिससे निगरानी प्रणाली अधिक चुस्त-दुरुस्त हो सके।
सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, मुख्य सचिव जेके सिन्हा, पुलिस महानिदेशक अनुराग सहित राज्य के सभी आठ सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) शामिल हुए। बैठक के दौरान केंद्रीय एजेंसियों और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और व्यापक सीमा प्रबंधन रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केवल भौतिक रूप से बाड़ लगा देने से सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, बल्कि इसके लिए स्थानीय प्रशासन, आधुनिक तकनीक और बीएसएफ के त्रिकोणीय समन्वय से एक अभेद्य सुरक्षा ढांचा तैयार करना होगा।
नशीले पदार्थों और हथियारों के अवैध कारोबार पर कड़ा प्रहार करते हुए गृह मंत्री ने सुरक्षाबलों को इस नेटवर्क से जुड़े हर अपराधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए। उन्होंने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में होने वाली संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों, बड़े निर्माण कार्यों और जमीनों की खरीद-बिक्री पर पैनी नजर रखें। इसके अलावा, पिछले पांच वर्षों के भूमि रिकॉर्ड्स की सघन जांच करने के भी आदेश दिए गए हैं। अमित शाह ने कलेक्टरों और जीएसटी अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता जताई और जाली नोटों (नकली मुद्रा) के मामलों की गहराई से जांच के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से सर्वे कराने की बात कही।