भारत ने नेपाल में पुनर्निर्मित 72 स्वास्थ्य केंद्र और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं सौंपीं; वित्तीय व डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर

भारत ने नेपाल में पुनर्निर्मित 72 स्वास्थ्य केंद्र और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं सौंपीं; वित्तीय व डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर

शनिवार को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद शुरू किए गए पुनर्निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत तैयार की गई 72 स्वास्थ्य सुविधाओं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाओं को वर्चुअल माध्यम से नेपाल सरकार को सुपुर्द किया।

इस उच्च स्तरीय बैठक की समाप्ति के बाद डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल के साथ उनकी बेहद सार्थक बातचीत हुई, जिसके बाद वर्ष 2015 के भूकंप पश्चात पुनर्निर्माण कार्यक्रम के तहत निर्मित 72 स्वास्थ्य केंद्रों और 12 सांस्कृतिक धरोहर परियोजनाओं को डिजिटल माध्यम से आधिकारिक रूप से नेपाल को सौंप दिया गया।

दोनों पड़ोसी देशों के बीच वित्तीय और डिजिटल कनेक्टिविटी को नया विस्तार देते हुए एक और बड़ा कदम उठाया गया। इसके तहत दोनों देशों के नागरिकों के बीच सीमा पार व्यक्तिगत धन प्रेषण (रेमिटेंस) की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) भारत और ‘नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस ऑफ नेपाल’ के बीच आपसी जुड़ाव (लिंकेज) की शुरुआत की गई। इसके अतिरिक्त, नेपाल के लिए ‘वॉयस फर्स्ट’ भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म के निर्माण हेतु राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य से ‘डिजिटल इंडिया भाषानी’ और ‘काठमांडू यूनिवर्सिटी’ के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान भी किया गया।

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान विदेश मंत्री ने दोनों राष्ट्रों की जनता की प्रगति, समृद्धि और कल्याण के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल साझेदारी के विभिन्न आयामों पर विस्तृत समीक्षा की। इस चर्चा में विकास सहयोग, आपसी कनेक्टिविटी, ऊर्जा क्षेत्र (विशेष रूप से जलविद्युत विकास), शिक्षा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, डिजिटल पहल, संस्कृति और खेल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

बैठक की शुरुआत में अपने प्रारंभिक वक्तव्य में विदेश मंत्री जयशंकर ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच बेहद विशिष्ट संबंध हैं, जिनकी नींव दोनों देशों की जनता के आपसी जुड़ाव, सीमा पार संपर्कों तथा साझा सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं पर टिकी है। यह रिश्ता आपसी विश्वास, सद्भावना और दोनों पक्षों के लाभ पर आधारित है। समय के साथ व्यापार, वाणिज्य, निवेश, ऊर्जा, विकास कार्यों, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में हमारे संबंध निरंतर मजबूत हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आज हमारे पास इस साझेदारी को स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सूचना प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे कई नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का बेहतरीन अवसर है। उन्होंने सुरक्षा पहलुओं पर बात करते हुए कहा कि दोनों देश अपनी लंबी और खुली सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मिलकर सहयोग करते हैं। दोनों देशों की गहरी एकजुटता पर बल देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम एशियाई क्षेत्र में जारी मौजूदा संकट के बावजूद भारत ने नेपाल को बिना किसी बाधा के ईंधन (फ्यूल) की आपूर्ति सुनिश्चित की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *