मध्यप्रदेश के गुना जिले में डायल-112 सेवा के जवानों ने 7 जून को एक सराहनीय और मानवीय कार्य करते हुए घायल हिरण के बच्चे का रेस्क्यू किया। म्याना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र में वन्यजीव को सुरक्षित बचाकर वन विभाग की टीम के हवाले कर दिया गया। पुलिसकर्मियों की इस समय पर की गई त्वरित कार्रवाई की वजह से ही पीड़ित शावक को तत्काल इलाज और आवश्यक देखभाल मिल सकी।
पूरी घटना की शुरुआत 7 जून को हुई, जब भोपाल स्थित राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 को एक आपातकालीन सूचना मिली। फोन करने वाले ने बताया कि म्याना थाना क्षेत्र के ग्राम जमरा के पास स्थित जंगल में एक हिरण का बच्चा गंभीर रूप से घायल पड़ा है। उसे किसी आवारा कुत्ते ने काटकर जख्मी कर दिया था, जिसके लिए तुरंत पुलिस की मदद की दरकार थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कंट्रोल रूम ने तत्काल म्याना क्षेत्र में गश्त कर रहे डायल-112 के ‘फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल’ (FRV) को मौके के लिए रवाना किया।
घटनास्थल पर तैनात डायल-112 के स्टाफ आरक्षक देवदत्त वर्मा और पायलट राजेश राजपूत ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि यह शावक अपने झुंड से अलग होकर भटक गया था और वन क्षेत्र के बाहर आने पर हादसे का शिकार हो गया। वह जख्मों के कारण काफी लाचार स्थिति में था।
दोनों जवानों ने तत्परता दिखाते हुए बिना समय गंवाए घायल शावक को अपनी सुरक्षा में लिया। इसके बाद उसे सरकारी वाहन की मदद से नजदीकी फॉरेस्ट चौकी ले जाया गया। वहाँ पुलिसकर्मियों ने वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर शावक को उनके सुपुर्द कर दिया, ताकि उसकी उचित देखरेख हो सके। फिलहाल वन कर्मियों की निगरानी में वन्यजीव का उपचार किया जा रहा है।
पुलिसकर्मियों के इस संवेदनशील कदम की वजह से एक बेजुबान वन्यजीव को समय रहते नया जीवन मिल सका। मध्य प्रदेश पुलिस की ‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला के तहत शामिल यह घटना यह साबित करती है कि राज्य की आपातकालीन पुलिस सेवा केवल इंसानों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति भी उतनी ही मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।