पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को एक अहम बयान जारी कर देश को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया में जारी हालिया संकट के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी, पाइप प्राकृतिक गैस (PNG) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की आपूर्ति शत-प्रतिशत बनी हुई है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजे भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता को निर्बाध बनाए रखने के लिए चौतरफा कदम उठाए हैं। इसके तहत आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन आवंटित किया जा रहा है।
मौजूदा स्थितियों के मद्देनजर मंत्रालय ने आपूर्ति और मांग दोनों मोर्चों पर रणनीतिक कदम उठाए हैं। घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादन को गति देने के साथ-साथ रसोई गैस की बुकिंग अवधि में भी बदलाव किए गए हैं। अब शहरी क्षेत्रों के लिए बुकिंग अंतराल को बढ़ाकर 21 से 25 दिन और ग्रामीण इलाकों के लिए 45 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रवासी श्रमिकों की जरूरतों को देखते हुए 2 और 3 मार्च 2026 की औसत दैनिक खपत के आधार पर 5 किलोग्राम वाले एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडरों की आपूर्ति को दोगुना कर दिया गया है। वाणिज्यिक गैस के आवंटन में अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है।
कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 के तहत राज्य सरकारों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पिछले चार दिनों के भीतर देशव्यापी स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रवर्तन अभियान चलाए गए हैं, जिसमें एलपीजी की जमाखोरी के खिलाफ 7 प्राथमिकी दर्ज कर 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अतिरिक्त, पेट्रोल-डीजल की खुदरा दुकानों पर 1800 से अधिक छापे मारे गए हैं। इस दौरान 2400 से अधिक खुदरा केंद्रों की जांच कर 22 पर जुर्माना लगाया गया और 554 दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
देश में घरेलू रसोई गैस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली को मजबूत किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले दिनों बुकिंग में 99% की भारी बढ़त देखी गई। वितरक स्तर पर संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) आधारित वितरण को 96% तक बढ़ाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते चार दिनों में 1.67 करोड़ सिलेंडरों की बुकिंग के मुकाबले वास्तविक रूप से 1.77 करोड़ सिलेंडरों की सफल डिलीवरी की गई है। वहीं, वाणिज्यिक श्रेणी में कुल आवंटन को संकट-पूर्व स्तर के 70 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है, जिसमें 10 प्रतिशत सुधार-आधारित हिस्सा शामिल है।
औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की निरंतरता बनाए रखने के लिए फर्टिलाइजर (यूरिया) संयंत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 98% गैस स्टॉक उपलब्ध कराया जा रहा है। देश में स्वच्छ ईंधन नेटवर्क के तेजी से विस्तार के लिए केंद्र ने हाल ही में 24 मार्च 2026 को पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश अधिसूचित किया है, जो पाइपलाइन बिछाने के काम को समयबद्ध और बाधारहित बनाने में मदद करेगा। साथ ही राष्ट्रीय पीएनजी ड्राइव 2.0 की अवधि को बढ़ाकर 30 जून 2026 कर दिया गया है। मार्च 2026 से अब तक करीब 9.16 लाख नए घरों तक गैस पहुंचाई जा चुकी है, जबकि बुनियादी ढांचा तैयार होने से कुल सक्रिय कनेक्शन 12.21 लाख हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके साथ ही, देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जून के शुरुआती सप्ताह में दो बड़ी उपलब्धियां दर्ज की गईं। 3 और 4 जून 2026 को क्रमशः दोपहिया और चार पहिया श्रेणी में नई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च की गईं, जिसके बाद 5 जून 2026 को केंद्रीय मंत्री द्वारा ‘E-85’ ईंधन बाजार में उतारा गया। उच्च एथेनॉल (80-85%) से तैयार यह ईंधन पारंपरिक E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है और पर्यावरण में होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 61% तक कम करने में सक्षम है।