रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 5 से 7 जून तक लद्दाख के लेह सेक्टर सहित कई संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों का तीन दिवसीय दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में देश की सैन्य तैयारियों, सुरक्षा ढांचे और रसद आपूर्ति की जमीनी हकीकत का जायजा लेना था। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस क्षेत्र में रक्षा सचिव ने खुद अग्रिम मोर्चों पर जाकर स्थिति की समीक्षा की।
अपनी इस विशेष यात्रा के दौरान रक्षा सचिव ने 14 कोर मुख्यालय में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और कमांडरों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में पूर्वी लद्दाख और उससे लगी सीमाओं पर सुरक्षा के मौजूदा हालातों तथा सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का गहराई से मूल्यांकन किया गया। तीन दिनों के इस दौरे में सिंह बेस कैंप और उत्तरी ग्लेशियर जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले उन बेहद दुर्गम क्षेत्रों में भी गए, जहां साल भर भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड रहती है।
अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों से सीधे संवाद करते हुए रक्षा सचिव ने उनकी तत्परता और हौसले को परखा। उन्होंने विषम परिस्थितियों में देश की संप्रभुता की रक्षा करने वाले जवानों की कर्तव्यनिष्ठा, वीरता और पेशेवर कार्यकुशलता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में भी सीमाओं को सुरक्षित रखने में हमारे सैनिकों का योगदान अद्वितीय और अत्यंत गौरवपूर्ण है।
इस महत्वपूर्ण दौरे पर रक्षा सचिव ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, सैन्य साजो-सामान के नेटवर्क और लंबे समय तक सेना की परिचालन स्थिरता को बनाए रखने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। जमीनी अधिकारियों ने उन्हें लद्दाख क्षेत्र में चल रही सुरक्षा व्यवस्थाओं और जारी निर्माण कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब लद्दाख सीमा सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
उल्लेखनीय है कि इस दौरे से कुछ समय पहले ही रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने रक्षा मंत्रालय के सुरक्षा निर्देशों की एक विस्तृत और नई नियमावली जारी की थी। मंत्रालय के मुताबिक, यह दस्तावेज सुरक्षा मानकों और गाइडलाइंस का एक व्यापक संग्रह है। इसे जारी करते हुए रक्षा सचिव ने सभी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को इन नए दिशा-निर्देशों को पूरी कड़ाई और संजीदगी से लागू करने के निर्देश दिए थे।