भारत सरकार ने सोमवार को पश्चिम एशिया के बिगड़ते सुरक्षा हालातों और बढ़ते सैन्य हमलों पर गहरा खेद प्रकट करते हुए सभी संबंधित पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस क्षेत्र में तेजी से बदलती परिस्थितियां संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह सैन्य संघर्ष अब 100 दिनों से अधिक की अवधि को पार कर चुका है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मानवीय संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही, इस युद्ध ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
विदेश मंत्रालय ने अपने वक्तव्य में कूटनीतिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा, “हम सभी पक्षों से यह पुरजोर अपील करते हैं कि वे हिंसक टकराव को तत्काल रोकें, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और शांति व स्थिरता की बहाली के लिए जारी राजनयिक वार्ताओं को तार्किक परिणति तक पहुंचाएं।” इस बीच, सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए एक यात्रा परामर्श (ट्रेवल एडवाइजरी) जारी किया है। इसमें भारतीयों को फिलहाल ईरान की यात्रा न करने की सख्त सलाह दी गई है, साथ ही वहां पहले से मौजूद नागरिकों को उपलब्ध परिवहन माध्यमों का उपयोग कर जल्द से जल्द देश छोड़ने को कहा गया है।
दूसरी ओर, सैन्य मोर्चे पर इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने सोमवार को पुष्टि की कि उसने ईरान के महशहर प्रांत में स्थित एक पेट्रोकेमिकल परिसर के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। एक अन्य सैन्य विज्ञप्ति में इजरायली सेना ने दावा किया कि सोमवार तड़के ईरान की तरफ से दागी गई सभी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इजरायली रक्षा बल के मुताबिक, वेस्ट बैंक के खुले इलाकों में जो धमाके या असर देखे गए, वे दरअसल मिसाइल इंटरसेप्शन के बाद गिरे मलबे के कारण थे। ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यरुशलम और उसके आसपास के क्षेत्रों में मिसाइल हमले के खतरे को देखते हुए जारी किया गया अलर्ट अब वापस ले लिया गया है।
इस सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के मुख्य कमांडर अली अब्दोल्लाही ने इजरायल को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी क्षेत्र दहियाह में अपने हमलों का दायरा बढ़ाया, तो उसे पहले से कहीं अधिक विनाशकारी और पछतावे से भरे जवाबी हमलों का सामना करना पड़ेगा। ईरानी कमांडर ने आरोप लगाया कि इजरायल लेबनान की जनता के खिलाफ हिंसक कृत्य कर रहा है और अमेरिकी संरक्षण व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्क्रियता का लाभ उठाकर युद्ध अपराधों को अंजाम दे रहा है, जिसमें फॉस्फोरस बम जैसे प्रतिबंधित हथियारों का प्रयोग भी शामिल है। उन्होंने कहा कि तमाम चेतावनियों को दरकिनार कर इजरायल ने दहियाह और दक्षिणी लेबनान में सभी सीमाओं को लांघ दिया है।
गौरतलब है कि इस व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की शुरुआत इसी वर्ष 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद हुई थी। इसके प्रतिशोध में ईरान ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर इजरायली व अमेरिकी ठिकानों सहित उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाया था। हालांकि, बाद में 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन उसके बाद आयोजित शांति वार्ताएं बेनतीजा रहीं। ताजा घटनाक्रमों के बीच, पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और अमेरिका ने शांति स्थापना के लिए नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है, और इस गतिरोध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार करने के प्रयास निरंतर जारी हैं।