हरित ऊर्जा क्षेत्र में मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक कदम; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दी 950 मेगावॉट सौर पार्कों की सौगात, मुरैना स्टोरेज प्रोजेक्ट का एग्रीमेंट लागू

हरित ऊर्जा क्षेत्र में मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक कदम; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दी 950 मेगावॉट सौर पार्कों की सौगात, मुरैना स्टोरेज प्रोजेक्ट का एग्रीमेंट लागू

अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने सोमवार को देश पटल पर एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में देश की अपनी तरह की अनूठी 440 मेगावॉट मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के विद्युत क्रय अनुबंध (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी तथा राज्य के ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला की उपस्थिति में कुल 950 मेगावॉट क्षमता वाले नीमच और शाजापुर सौर पार्कों का भी विधिवत लोकार्पण किया गया। यह आयोजन प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उत्पादन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित थे।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान समय में विद्युत के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने मुरैना परियोजना को चंबल संभाग के विकास के लिए एक बड़ा उपहार बताते हुए कहा कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा तकनीकी मॉडल है, जिसमें एक ही बैटरी का रोजाना दो बार उपयोग किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त किया कि देश में पहली बार इस श्रेणी के लिए ₹2.70 प्रति यूनिट की सबसे प्रतिस्पर्धी और न्यूनतम दर प्राप्त हुई है। उन्होंने विकास कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के सहयोग से मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सालों पुराना पानी का विवाद सुलझा है, जिससे पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना के जरिए मालवा और चंबल के 13 जिलों की कायापलट होगी।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने मध्य प्रदेश के प्रदर्शन को पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विज़न की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश को नंबर वन बनाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद यह लक्ष्य रखा गया है कि अगले एक साल के भीतर राज्य की समस्त सरकारी इमारतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर दिए जाएंगे। श्री जोशी ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में नवीन ऊर्जा परियोजनाओं का क्रियान्वयन सबसे तेज गति से हो रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

यह उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश अब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ऊर्जा भंडारण आधारित अक्षय ऊर्जा खरीद मॉडल को अपनाने वाला देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मुरैना परियोजना के टेंडर में देश-विदेश की 16 बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था, जहां 12 घंटे की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद यह ऐतिहासिक न्यूनतम टैरिफ प्राप्त हुआ। रीवा सौर परियोजना से दिल्ली मेट्रो और आगर-शाजापुर-नीमच परियोजना से भारतीय रेलवे को बिजली की आपूर्ति पहले से ही सफलतापूर्वक की जा रही है। इन परियोजनाओं को एनटीपीसी, टाटा पॉवर और वारी एनर्जीस जैसे प्रतिष्ठित डेवलपर्स ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर धरातल पर उतारा है।

भविष्य की रणनीतियों को रेखांकित करते हुए प्रदेश सरकार ने निवेश की प्रक्रियाओं, जैसे भूमि आवंटन और विभागीय मंजूरियों को बेहद सरल और समयबद्ध बना दिया है। राज्य सरकार ने उद्योगों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बाद 4 और 6 घंटे की स्टोरेज निविदाएं भी जारी की हैं। इसके अतिरिक्त, निर्बाध बिजली आपूर्ति (24×7 राउंड-द-क्लॉक) सुनिश्चित करने के लिए 1 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण प्री-बिड बैठक आयोजित होने जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे फीडर सौर ऊर्जीकरण कार्यक्रम में ₹2.40 प्रति यूनिट की रिकॉर्ड दर मिली है, जिससे किसानों को दिन में भी उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिल सकेगी। आगामी वर्षों में 20,000 मेगावॉट से अधिक हरित ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य के साथ मध्य प्रदेश देश की स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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