प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिनों की आधिकारिक सेशेल्स यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर स्वदेश वापस लौट रहे हैं। प्रस्थान से पूर्व प्रधानमंत्री ने इस दौरे को दोनों देशों के हितों के लिहाज से अत्यंत फलदायी और ऐतिहासिक बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यात्रा की मुख्य झलकियां साझा करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस यात्रा के दौरान जो ठोस परिणाम निकलकर सामने आए हैं, वे भारत और सेशेल्स की पारंपरिक मित्रता को एक अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेंगे।
यह दौरा रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर काफी अहम रहा, जिसके तहत दोनों राष्ट्रों ने कुल 19 समझौतों और घोषणाओं को अंतिम रूप दिया। इन अहम फैसलों में आपसी कानूनी सहयोग के तहत प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए गए, साथ ही वित्तीय क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू करने की भी घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त, पीएम मोदी ने सेशेल्स और यूरोपीय संघ (EU) के मध्य संबंधों को सुदृढ़ करने में भी इस यात्रा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
दोनों देशों के बीच सहयोग की स्वर्ण जयंती पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 50 वर्षों की हमारी यात्रा गहरे आपसी भरोसे और प्रगति की साझी विरासत पर टिकी रही है। उन्होंने भविष्य का खाका खींचते हुए कहा कि अगले पचास साल दोनों देशों के लिए नए नवाचारों, टिकाऊ विकास और सामूहिक समृद्धि के सूचक बनेंगे।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बन गए हैं। यह अवसर इसलिए भी खास था क्योंकि सेशेल्स अपनी आजादी के 50 वर्ष पूरे कर रहा है। समारोह का हिस्सा बनने पर खुशी जाहिर करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति हर्मिनी, वहां के शासन और सेशेल्स की जनता द्वारा दिए गए अपार स्नेह और आदर सत्कार के लिए दिल से आभारी हैं।
अपनी यात्रा के आखिरी चरण में प्रधानमंत्री ने पीस पार्क पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा को नमन किया। वहां भारी संख्या में एकत्रित हुए भारतीय प्रवासियों ने तिरंगा लहराकर और ‘भारत माता की जय’ व ‘मोदी-मोदी’ के उद्घोष के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया, जिनसे पीएम मोदी ने आत्मीय बातचीत भी की। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि विक्टोरिया के पीस पार्क में बापू को दी गई यह श्रद्धांजलि हमें याद दिलाती है कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों के लिए बापू के आदर्श दुनिया को एकजुट करते हैं और एक श्रेष्ठ समाज के गठन की हमारी कोशिशों को प्रेरित करते हैं।