राज्यसभा के सात नए सदस्यों ने ली सदस्यता की शपथ, सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने दिलाई निष्ठा की शपथ

राज्यसभा के सात नए सदस्यों ने ली सदस्यता की शपथ, सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने दिलाई निष्ठा की शपथ

नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित एक औपचारिक समारोह में राज्यसभा के सात नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों ने संसद के उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इन सभी नवनिर्वाचित सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर सदन में देश के कई शीर्ष राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।

संसद के उच्च सदन का कार्यभार संभालने वाले इन सात सांसदों में जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया, मानसिंह मेरामन परमार, तरुण चुघ, डॉ. अलका सिंह, राजेंद्र हीरालाल जैन, अधिकारीमायुम शारदा देवी और एम. नागराजा के नाम शामिल हैं। इन सभी सदस्यों ने देश के विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प लिया।

इस शपथ ग्रहण समारोह की सबसे खास बात इसकी भाषाई विविधता रही, जहां सांसदों ने अपनी क्षेत्रीय और मातृभाषाओं में शपथ ली। कुल सात सदस्यों में से चार ने अपनी बात रखने के लिए हिंदी भाषा का चयन किया। वहीं अन्य तीन सदस्यों ने क्रमशः पंजाबी, कन्नड़ और मणिपुरी भाषाओं में सदन की सदस्यता की शपथ ग्रहण की।

भौगोलिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से इस बार गुजरात से दो नेताओं ने संसद के इस उच्च सदन का रुख किया है। इनके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मणिपुर जैसे राज्यों से एक-एक नवनिर्वाचित सदस्य ने राज्यसभा की सदस्यता हासिल की है, जो सदन की बहुसांस्कृतिक छवि को दर्शाता है।

इस महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया के साक्षी बनने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के कई दिग्गज नेता कार्यक्रम में मौजूद रहे। इनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के साथ-साथ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा उपस्थित थे। साथ ही संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी शिरकत की। विपक्षी खेमे से राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

समारोह को सुचारू रूप से संपन्न कराने में राज्यसभा सचिवालय की भी अहम भूमिका रही। इस दौरान राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी सहित सचिवालय के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी सदन में उपस्थित रहे और उन्होंने सभी औपचारिकताओं को पूरा करवाया।

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