भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के तीन प्रमुख युद्धपोत—आईएनएस उदयगिरि, कवरत्ती और शक्ति—1 जुलाई 2026 को सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर पहुंचे। यह आगमन पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद की अगुवाई में हुआ है। रक्षा मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच दशकों पुराने मजबूत और करीबी नौसैनिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ करना है। यह तैनाती दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय नौसेना के वर्तमान परिचालन अभियान का एक हिस्सा है, जो सीधे तौर पर भारत सरकार की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और व्यापक ‘महासागर दृष्टिकोण’ (ओशन विजन) का प्रतिनिधित्व करती है।
यह रणनीतिक दौरा ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026’ के निर्धारित लक्ष्यों को अमली जामा पहनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। चांगी बंदरगाह पर रुकने के दौरान, दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों के बीच कई महत्वपूर्ण आधिकारिक और पेशेवर बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस दौरान दोनों पक्षों के जवान और अधिकारी एक-दूसरे के युद्धपोतों का मुआयना करेंगे। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा को पुख्ता करने और साझा हितों से जुड़े विभिन्न तकनीकी व सामरिक विषयों पर विस्तृत बातचीत की जाएगी।
इस यात्रा के दौरान होने वाली साझा गतिविधियों से दोनों सेनाओं के कर्मियों को अपने परिचालन अनुभवों को साझा करने का बेहतरीन मौका मिलेगा। वे एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) को समझ सकेंगे, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल और संयुक्त अभियानों को अंजाम देने की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में सामूहिक समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, क्षेत्रीय सहयोग का दायरा बढ़ाने तथा अपने समुद्री सहयोगियों के साथ आपसी रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नौसेना का यह सिंगापुर दौरा इसी साझा संकल्प को दर्शाता है, जो अंततः एक सुरक्षित, नियम-आधारित और समावेशी समुद्री परिवेश के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।