भारत-जापान आर्थिक मंच में पीएम मोदी का संबोधन: दोनों देशों की अटूट साझेदारी और भविष्य के रोडमैप पर दिया विशेष बल

भारत-जापान आर्थिक मंच में पीएम मोदी का संबोधन: दोनों देशों की अटूट साझेदारी और भविष्य के रोडमैप पर दिया विशेष बल

नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक और सुदृढ़ आर्थिक संबंधों को रेखांकित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वाणिज्य, निवेश, टेक्नोलॉजी और नवाचार (इनोवेशन) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। इस मंच पर उन्होंने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का खाका पेश किया।

संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में मौजूद दिग्गजों का स्वागत किया और प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मंच पर उपस्थित कई जापानी कंपनियां दशकों से भारत के साथ सक्रियता से जुड़ी हुई हैं, जबकि कुछ कंपनियां तो एक सदी से भी अधिक समय से भारत की विकास यात्रा में सहयात्री रही हैं। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने इस मंच से जुड़ने वाले नए व्यापारिक सहयोगियों का स्वागत करते हुए उन्हें भारत और जापान की इस साझा सफलता का हिस्सा बनने की बधाई दी।

द्विपक्षीय संबंधों की प्रगाढ़ता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी वास्तव में विशिष्ट है, जिसके कई बेहतरीन उदाहरण हमारे सामने हैं। हाल ही में हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के नए विनिर्माण संयंत्र (मैन्युफैक्चरिंग प्लांट) की शुरुआत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में सुजुकी द्वारा वैश्विक स्तर पर निर्मित की जाने वाली कुल कारों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भारत में ही तैयार होता है, जिन्हें 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की पीएम ताकाइची को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि पीएम ताकाइची को मोटर बाइक चलाने का काफी शौक है। इसी कड़ी में उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि कावासाकी, यामाहा और होंडा जैसी प्रतिष्ठित जापानी कंपनियों द्वारा भारत में बनाई गई मोटरसाइकिलें आज वैश्विक बाजारों में धूम मचा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि चाहे एयर कंडीशनर हो, पावर ग्रिड के उपकरण हों या फिर मेडिकल टेक्नोलॉजी; जब भी जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश का भारत की कार्य-गति और व्यापक पैमाने के साथ मिलन होता है, तो उसका लाभ संपूर्ण विश्व को मिलता है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में रुकावटों, व्यापारिक अनिश्चितताओं और मांग में गिरावट जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही हैं। ऐसे समय में एक पुरानी कहावत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में मजबूत लोग और अधिक कड़ा परिश्रम करते हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत आज विश्व की सबसे तीव्र गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसने बीते वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर दर्ज की है। पिछले 12 वर्षों में निरंतर किए गए नीतिगत सुधारों ने भारतीय आर्थिक तंत्र को बेहद मजबूत बनाया है।

व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने साझा किया कि कुछ महीने पहले ही सरकार ने कराधान (टैक्स), शासन व्यवस्था और ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधारों को धरातल पर उतारा है। अब अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है और प्रमुख सेक्टर्स में विशेष प्रोत्साहन (incentives) दिए जा रहे हैं। यही कारण है कि जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के सर्वेक्षण में भारतीय बाजार लगातार चौथे वर्ष जापानी कंपनियों के लिए निवेश के लिहाज से सबसे पसंदीदा और आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।

अंत में, द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जल्द ही एक विशेष “जापान बिजनेस वीक” का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष सप्ताह के दौरान पीएमओ के शीर्ष अधिकारी जापानी निवेशकों और प्रतिनिधियों के साथ सीधी बैठकें करेंगे। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य जापानी कारोबारियों की आवश्यकताओं को सुनना और भारत में व्यापारिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने पर गहन चर्चा करना होगा, ताकि जापानी निवेश और सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

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