संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन नीट-यूजी परीक्षा में हुई गड़बड़ी के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने जमकर विरोध जताया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर तक तीन बार रोकना पड़ा। विपक्षी सदस्यों के लगातार बढ़ते हंगामे के कारण सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल की प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित हो गई।
सोमवार सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की बैठक आरंभ हुई, तो सबसे पहले दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके तुरंत बाद ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से शांति बनाए रखने और कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने का अनुरोध किया, लेकिन उनके इस आग्रह का असर नजर नहीं आया।
विपक्ष के न मानने पर अध्यक्ष ने दोपहर 12 बजे तक के लिए पहली बार कार्यवाही स्थगित कर दी। इसके बाद जब दोपहर 12 बजे दोबारा बैठक शुरू हुई, तो हंगामे के चलते महज सात मिनट के भीतर ही कार्यवाही को फिर से रोकना पड़ गया।
तीसरी बार दोपहर 12:30 बजे कार्यवाही आरंभ होने पर भी सदन का माहौल वैसा ही बना रहा। इस दौरान पीठ पर मौजूद दिलीप सैकिया ने नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों से देश के विभिन्न राज्यों में आई बाढ़ जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बात करने की अपील की, परंतु इसका भी कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। अंततः सदन की कार्यवाही को दोपहर 1 बजे तक के लिए फिर स्थगित कर दिया गया।
दूसरी तरफ, उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी गतिरोध का यही आलम देखने को मिला। वहां भी नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के तुरंत पश्चात विपक्ष ने शोर-शराबा आरंभ कर दिया। इसके चलते उच्च सदन को भी पहले 12 बजे तक, फिर दोबारा शुरू होने पर मात्र एक मिनट के भीतर 12:30 बजे तक और तीसरी बार भी एक मिनट के भीतर ही दोपहर तक स्थगित करना पड़ा। मानसून सत्र के आगाज पर ही दोनों सदनों की इस तस्वीर से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आगे का सत्र काफी गहमगहमी भरा रहेगा।